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20 रुपए की रिश्वत केस का अजीब अंत!, 30 साल बाद हुए बरी, फिर अगले ही दिन…

अक्सर देखने को मिला है कि भारत में न्यायिक प्रणाली में न्याय तो मिलता है लेकिन उस न्याय को मिलने में काफी देर लग जाती है। ऐसा ही एक मामला गुजरात से सामने आ रहा है जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल एक व्यक्ति पर 20 रुपए की रिश्वत लेने का आरोप लगा। उसकी लगभग सारी जिंदगी जेल में बीत गई।

30 साल बाद कोर्ट ने उस शख्स को निर्दोष सिद्ध कर बरी कर दिया। इस केस का अंत उस व्यक्ति और उसके परिवार वालों के लिए एक अच्छे नोट पर अंत होता, अगर वो व्यक्ति जीवित रहता। जी हां, जेल से बरी होने के एक ही दिन बाद व्यक्ति की मौत हो गई। जिसके बाद सवाल तो बनता है कि आखिर 20 रुपए का आरोप 30 साल की सजा से बड़ा है? अगर एक दिन पहले वो बरी नहीं होते तो शायद वो बिना अपने निर्दोष साबित होने वाला ऑर्डर सुनकर ही इस दुनिया से चले जाते। उन्हें लगता कि उनकी पूरी जिंदगी पर ये दाग लगा रह गया।

20 rupees bribery case

20 रुपए की रिश्वत के लिए हुई जेल, 30 साल बाद किया बरी

दरअसल ये घटना 1994 की हॉलीवुड फिल्म द शॉशैंक रिडेम्पशन की कहानी को याद दिलाती है। उसमें भी एक निर्दोश काफी लंबे समय तक जेल में बंद रहता है। इस मामले की बात करें तो चार फरवरी 2026 को गुजरात हाई कोर्ट ने बुधवार को अपने फैसले में व्यक्ति को निर्दोष घोषित किया।

जीवन से एक बहुत बड़ा कलंक मिट गया

इस फैसले को सुनकर व्यक्ति भावुक हो गया। उन्होंने कहा कि उनके जीवन से एक बहुत बड़ा कलंक मिट गया। अगर इसके बाद भगवान भी उन्हें उठा लें तो उन्हें कोई दुख नहीं होगा। लेकिन किसी को ये नहीं पता था कि इसी कलंक को मिटाने के लिए वो जी रहे थे।

ये बात है साल1996 की

दरअसल बाबूभाई प्रजापति ने अपने जीवन के 30 साल जेल में बिताए। वो उस वक्त अहमदाबाद में पुलिस कांस्टेबल के पद पर तैनात थे। उस समय उनपर 20 रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगा था। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत के उनपर केस दर्ज किया गया। 1997 में सेशन कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई। 2002 में बाबूभाई प्रजापति के खिलाफ आरोप तय हुए। साल 2004 में सेशन कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया और चार साल की सजा सुनाई। साथ ही उनपर 3,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया।

मामले में हाई कोर्ट ने निर्दोष करार दिया

इस फैसले को प्रजापति ने गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी। 22 साल तक उनकी अपील लंबित रही। आखिरकार इस साल बुधवार 4 फरवरी, 2026 को हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया और उन्हें निर्दोष करार दिया।

अगले ही दिन हो गई मौत

प्रजापति के वकील ने बताया कि ये पूरा मामला सिर्फ शक पर आधारित था। कोर्ट के फैसले को सुनकर प्रजापति ने भावुक शब्द कहे। जिसके बाद वो अपने घर लौट गए। लेकिन अगले ही दिन उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई।

Uma Kothari

उत्तराखंड की डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय उमा कोठारी खबर उत्तराखंड (khabaruttarakhand.com) में बतौर पत्रकार कार्यरत हैं। वे राजनीति, मनोरंजन, खेल और ट्रेंडिंग विषयों पर गहन और तथ्यपरक खबरें लिखती हैं। उत्तराखंड के स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों पर इनकी पकड़ मजबूत है। डिजिटल मीडिया में इनका अनुभव पाठकों को सटीक, संतुलित और समय पर जानकारी देने में सहायक है। उत्तराखंड | खबर उत्तराखंड
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