उत्तराखंड सरकार को हाईकोर्ट की फटकार, कहा-कर्मचारियों का वेतन रोकना असंवैधानिक, जल्द करें जारी

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नैनीताल। कई महीनों से वेतन का इंतजार कर रहे कर्मचारियों के लिए आज मंगलवार को हाई कोर्ट से बड़ी राहत भरी खबर आई। बता दें कि वेतन रोके जाने के मामले पर हाईकोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों का वेतन रोकना अंसवैधानिक है। इसलिए सरकार कर्मचारियों को जल्द से जल्द वेतन जारी करें। हाई कोर्ट ने ये टिप्पणी 6 महीने से वेतन का इंतजार कर रहे रोडवेज कर्मचारियों की याचिका पर की है।

मुख्य सचिव, वित्त सचिव, परिवहन सचिव, महानिदेशक परिवहन हुए पेश

आपको बता दें कि उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी संघ ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 6 महीनों से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। सरकार और परिवहन निगम न तो संविदा कर्मचारियों को नियमित कर रही है, न उनको नियमित वेतन दिया जा रहा है। उनको पिछले 4 साल से ओवर टाइम भी नहीं दिया गया। रिटायर्ड कर्मचारियों के देयकों का भी भुगतान नहीं किया गया है। इसी लेकर मंगलवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हो रही थी। इस दौरान कोर्ट में राज्य के मुख्य सचिव, वित्त सचिव, परिवहन सचिव, महानिदेशक परिवहन, एडवोकेट जनरल, मुख्य स्थायी अधिवक्ता वीडियो काॉफ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए।

कोर्ट ने परिवहन सचिव से पूछा – 34 करोड़ रुपये आपको मिले या नहीं

कोर्ट ने परिवहन सचिव से पूछा कि 34 करोड़ रुपये आपको मिले या नहीं। जिस पर सचिव ने कहा कि अभी नहीं मिले। सरकार ने 34 करोड़ रुपये जारी करने का जीओ पास कर दिया है। जिस पर कोर्ट ने आज या कल सरकार से 34 करोड़ रुपये रिलीज करने को कहा। कर्मचारियों के भविष्य में वेतन दिए जाने पर कहा कि एकएक संपूर्ण प्रपोजल बनाकर आगामी कैबिनेट मीटिंग में रखें, जिससे कि यह समस्या बार-बार न आने पाए।

कोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खण्डपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान निगम की तरफ से कोर्ट के सम्मुख यह भी कहा गया कि जबतक निगम की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हो जाती तब तक कर्मचारियों को 50 प्रतिशत वेतन दिया जाय, जिस पर कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि सरकार को कोई अधिकार नहीं है कि वह कर्मचारियों के वेतन में कटौती करे। कोर्ट ने कहा कि यहां उपस्थित आईएएस अधिकारियों के 50% वेतन की कटौती क्यों न कर दी जाए। खंडपीठ ने कहा है कि सरकार को यह अधिकार नही है, कि वह कर्मचारियों का वेतन रोके। यह संविधान के अनुच्छेद 14,19, 21, 300A मौलिक अधिकारों और मानवाधिकार आयोग का खुला उल्लंघन है।

खंडपीठ ने कहा, पूर्व में कोर्ट ने केंद्र सरकार के परिवहन मंत्रालय को निर्देश दिए थे कि परिसम्पतियों के बंटवारे के लिए दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक कर निर्णय लें, परन्तु अभी तक उस पर कुछ भी नही हुआ। अब तीन माह के भीतर दोनों प्रदेशो के मुख्य सचिवों की बैठक कर इस मामले में निर्णय लें। उत्तराखंड को बने 21 साल होने को है अभी तक बटवारा नहीं हो पाया है। जबकि अभी केंद्र व दोनों राज्यो में एक ही पार्टी की सरकार है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार अगस्त की तिथि नियत की है।

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