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उद्घाटन से पहले चौंकाने वाला सच: Delhi-Dehradun Expressway के अंडरपास से गुजर रहे हाथी-सियार

दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे को लेकर एक अहम और दिलचस्प रिपोर्ट सामने आई है, जिसने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की नई मिसाल पेश की है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा जारी ‘लैंडस्केप्स रीकनेक्टेड’ रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इस कॉरिडोर पर बनाए गए अंडरपास का वन्यजीव बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहे हैं।

Delhi-Dehradun Expressway के अंडरपास से गुजर रहे हाथी-सियार

रिपोर्ट के मुताबिक, गणेशपुर से आशारोड़ी के बीच 18 किलोमीटर लंबे हिस्से में किए गए अध्ययन के दौरान अंडरपास से गुजरते हुए 18 अलग-अलग वन्य प्रजातियों की 40,444 तस्वीरें कैद की गई। यह आंकड़ा साफ तौर पर दिखाता है कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और वन्यजीव संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।

अंडर पास से गुजरते नजर आए बाघ, हाथी और सियार

बता दें यह पूरा क्षेत्र शिवालिक पर्वतमाला के अंतर्गत आता है, जो बाघ, हाथी, ग्रेटर हॉर्नबिल और किंग कोबरा जैसी संवेदनशील और दुर्लभ प्रजातियों का आवास है। खास बात यह है कि इस कॉरिडोर के करीब 20 किलोमीटर हिस्से में 10.97 किलोमीटर लंबा अंडरपास बनाया गया है, ताकि जानवर बिना किसी बाधा के एक स्थान से दूसरे स्थान तक जा सकें।

अध्ययन के लिए लगाए थे हाई-टेक ट्रैप कैमरा

अध्ययन के लिए 150 हाई-टेक कैमरा ट्रैप और 29 ऑडियो रिकॉर्डर लगाए गए थे। 40 दिनों तक चली इस निगरानी में कुल 1 लाख 11 हजार 234 तस्वीरें रिकॉर्ड की गई, जिनमें से 40 हजार से अधिक सिर्फ वन्यजीवों की थीं। इन तस्वीरों में सबसे ज्यादा संख्या गोल्डन जैकाल की रही, जबकि नीलगाय, सांभर और चित्तीदार हिरण भी बड़ी संख्या में नजर आए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि हाथियों के अंडरपास इस्तेमाल करने के 60 से ज्यादा उदाहरण सामने आए।

Sakshi Chhamalwan

उत्तराखंड की युवा और अनुभवी पत्रकार साक्षी छम्मलवाण टीवी और डिजिटल मीडिया दोनों में कार्य का अनुभव रखती हैं। वर्तमान में वे खबर उत्तराखंड (khabaruttarakhand.com) से जुड़ी हैं। उत्तराखंड की राजनीतिक हलचल, देश-दुनिया की प्रमुख खबरें और धर्म से जुड़े विषयों पर इनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक और गहन होती है। उत्तराखंड | TV + Digital Media खबर उत्तराखंड
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