कांग्रेसियों ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल को किया याद

भारत की पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी की पुण्य तिथि एवं पूर्व गृह मंत्री लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के मौके पर उत्तराखंड में कांग्रेसियों ने श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए। कार्यक्रम में दोनों विभूतियों के चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए। देहरादून कांग्रेस मुख्यालय में एक गोष्ठी भी आयोजित की। जिसमें दोनों महान विभूतियों से प्रेरणा लेने का संकल्प किया गया।

कांग्रेस भवन में आयोजित गोष्ठी में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि स्व. इंदिरा गांधी को खुद बीजेपी के बड़े नेता अटल बिहारी वाजपेई ने दुर्गा का अवतार कहा। बचपन में ही स्व. इंदिरा ने पांच साल की उम्र में अपनी विदेशी गुड़िया को आग के हवाले कर दिया। नौ साल की उम्र में माता ने साथ छोड़ दिया, पिता जेल में थे। ऐसे समय में रविंद्रनाथ टेगौर ने उनकी शिक्षा का जिम्मा उठाया। उस छोटी बच्ची के मन में राष्ट्र निर्माण का संस्कार पंडित जवाहर लाल नेहरू ने चिट्ठियों के माध्यम से किया। गोष्ठी में स्व. सरदार पटेल के जीवन पर भी विस्तार से बताया गया।

वहीं पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट ने कहा कि स्व. इंदिरा गांधी ने देश के लिए शहादत दी और देश को टूटने नहीं दिया। जबकि स्व. वल्लभभाई पटेल ने देश की एकता और अखंडता के लिए बहुत बड़ा काम किया। ऐसे में हमें इन दोनों विभूतियों से प्रेरणा लेनी चाहिए। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि इंदिरा गांधी और सरदार पटेल विश्व में स्थापित नेताओं की श्रेणी में शामिल थे। जहां भी चर्चाएं होती हैं, वहां दोनों का नाम लिया जाता है। दोनों ने ही अपनी क्षमताओं के अनुरूप देश को विपत्तियों से निकाला।

गोदियाल ने कहा कि भावी पीढ़ी को हमें सच्चाई बतानी होगी। इन दोनों महान विभूतियों का लोकतंत्र में बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस मौके पर कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि कांग्रेस का इतना समृद्धशाली इतिहास है। जब से कांग्रेस की स्थापना हुई, तब से लेकर अब तक किसी भी कांग्रेसी को गर्व होता है। आज के संकट के दौर में जब हम दोनों महान नेताओं को याद कर रहे हैं, कांग्रेस का पूरा इतिहास, संघर्ष और शहादत का, देश की आजादी का इतिहास है। इससे किसी की तुलना नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी वह लोह महिला थी, जिसने पाकिस्तान को सबसे बड़ा सबक सिखाया।

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