इस गांव में बच्चे नहीं कर सकेंगे मोबाइल का इस्तेमाल, नहीं तो मिलेगी ये सजा

mobile phone

आजकल बच्चों में मोबाइल की तल बढ़ती ही जा रहा है और परिजन भी बच्चों की इस लत के आगे मजबूर से नजर आते हैं, लेकिन महाराष्ट्र के बांसी गांव में बच्चों के मोबाइल को लेकर कुछ ऐसा सोचा गया जो किसी ने सोचा न होगा। ग्राम पंचायत ने बच्चों के मोबाइल प्रयोग करने पर प्रतिबंध ही लगा दिया है। इसके साथ ही सख्त चेतावनी भी दी गई है कि यदी नाबालिगों के हाथ में मोबाइल देखा गया तो इसकी सजा परिवारवालों को जुर्माना चुकाकर भरना पड़ सकता है।

ग्राम पंचायत अपने फैसले के कारण चर्चा में बनी है। ग्राम पंचायत ने 11 नवंबर को ग्रामसभा का आयोजन कर नाबालिगों के मोबाइल प्रयोग पर पाबंदी लगा दी। 18 वर्ष के कम उम्र के बच्चे मोबाइल का उपयोग नहीं कर सकते। सभा में गांव के अध्यापकों, ग्रामीणों और अभिभावकों के साथ सरपंच की दो घंटे तक बैठक हुई। जिसमें कहा गया कि ऑनलाइन क्लासेस शुरू नहीं होने के बावजूद बच्चे दिन-रात मोबाइल से में लगे रहते हैं। यह लत बच्चों का भविष्य बर्बाद कर रही है। सरपंच गजानन टाले के मुताबिक ग्रामीणों की मांग पर बच्चों का भविष्य सुधारने के लिए यह फैसला लिया गया है। इसके खिलाफ बच्चे मोबाइल का प्रयोग करेंगे, तो देना होगा जुर्माना और मकानों का टैक्स भी बढ़ा दिया जाएगा।

बच्चों को खाने-पीने की भी सुध नहीं

सरपंच के मुताबिक सबसे पहले गांव की जिला परिषद स्कूल के अध्यापक उनके पास आए थे, जिसमें उन्होंने बताया कि कोरोनाकाल में बच्चे स्कूल नहीं आ पा रहे थे, इसलिए ऑनलाइन कक्षा ली जा रही थी। उसी समय से मोबाइल की लत बच्चों को लग गई है। बच्चे मोबाइल से पढ़ाई करने की बजाय गेम खेल रहे हैं। साथ ही ऐसी चीजें भी देख रहे हैं जो उन्हें नहीं देखनी चाहिए। मोबाइल की लत में खाने-पीने की सुध नहीं रहती। पढ़ाई नहीं करते और घर के काम भी न के बराबर करते हैं।

बिगड़ रही मानसिकता

ग्राम पंचायत की सभा में बताया गया कि कक्षा चौथी और पांचवी कक्षा के बच्चों के बारे में सबसे अधिक शिकायतें हैं। बच्चों की मानसिकता मोबाइल के कारण बिगड़ती जा रही है।
मोबाइल के लिए रोते हैं बच्चे

अध्यापकों के मुताबिक कोरोना के बाद ऑनलाइन पढ़ाई नहीं होने के बावजूद बच्चे मोबाइल से चिपके रहते हैं। मोबाइल के लिए रोते हैं। पढ़ाई में वे पिछड़ते जा रहे हैं, जिससे यह विषय सरपंच तक पहुंचा। इस गांव की जनसंख्या 3 हजार है, जिसमें विद्यार्थियों की संख्या 350 से 400 है। गांव में एक हाईस्कूल, 2 जिला परिषद की प्राथमिक स्कूलें हैं। यहां पढ़ने वाले बच्चे कोरोना के पहले पढ़ाई में अच्छे नंबर लाते थे, लेकिन अब वे पिछड़ गए हैं। इस ग्रामसभा की अध्यक्षता गांव के युवा सरपंच गजानन टाले ने की।

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