चमोली : विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कई सरकारी विभागों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने रोपे पौधे

चमोली : यूं तो आजके दिन विश्व भर में वर्ष के 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाये जाने का रिवाज है.. ..या यूं भी कहा जा सकता है कि यह मात्र फैशन शो जैसा भी बनता जा रहा है।हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं कि वर्ष भर बहुत कम ही लोग प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण की कुछ बातें करते हैं।आज आये दिन जिस तरीकों से सरकारी निर्माण कार्यों और अवैध कार्यों के लिए प्रकृति का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है और जंगलों को लगातारआग के हवाले किया जा रहा है …उसको देखते हुए यह पुख्ता तौर कहना मुनासिब नहीं होगा कि हमारी प्रकृति और पर्यावरण बिल्कुल ही सुरक्षित है।आज कोरोनकाल ने यकायक लोगों को हो रही ऑक्सीजन की भारी दिक्कतों के बाद भी अगर लोग प्रकृति की नेमतों को समझ कर उसके संरक्षण के लिए आगे बढ़ कर आयें तो ही हम कह सकते हैं कि दुनियां ने प्रकृति के साथ किए जा रहे गुनाहों से कुछ सबक लिए हैं।परंतु विश्व भर के पर्यावरण प्रेमी आजतक धरती को संजो कर रखने के लिए चिल्लाने के सिवाय आखिर कर भी क्या सकते हैं।हम लोग हैं कि अति आधुनिकता के पीछे सब कुछ मटिया मेट करते हुए सरपट भागते जा रहे हैं।

बहरहाल आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जनपद चमोली के विभिन्न हिस्सों में सरकारी विभागों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बंजर भूमि में वृक्षारोपण किए।जिले के कई क्षेत्रों में आज हल्दी और झमाझम बारिश भी होती रही।जिस कारण वृक्षारोपण करने में बड़ी सहूलियत हुई।

आज दोपहर 11 बजे के करीब अलंकनंदा वन प्रभाग असेड़ सिमली रेंज के वन क्षेत्राधिकारी हरीश थपलियाल,पश्चिमी पिण्डर रेंज बद्रीनाथ वन प्रभाग के वन क्षेत्राधिकारी जुगल किशोर चौहान,खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के पूर्ति निरीक्षक धीरज जोशी,और पुलिस प्रशासन की ओर से एस आई विनोद चौरसिया के नेतृत्व में सयुंक्त रूप से बारिश और कोहरे के बीच बद्रीनाथ वन प्रभाग मुख्यालय के समीप बंजर पड़ी भूमि में वृक्षारोपण किया।वृक्षारोपण करने के बाद सभी ने वन,पर्यावरण और प्रकृति को बचाने का संकल्प लिया।

इसी तरह जिले के विभिन्न हिस्सों में आज लोगों ने कोरोना से सबक लेते हुए वृक्षारोपण किए और जल,जंगल,जमीन को बचाने का संकल्प लिए।तथा एक दूसरे को प्रकृति के अति और अवैध दोहन को रोकने की अपील सांझा किए।

इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की कि सरकारों को जल,जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए नागरिकों को सीधे सीधे बराबरी की भागीदारी सौंपी जानी चाहिए जिससे प्रकृति की सुरक्षा सबकी जिम्मेदारी तय हो सकेगी।इस तरह आम आदमी जंगलों और उसके संसाधनों की रखवाली भी करेंगे।लोगों का कहना था कि प्रकृति और उसके संसाधनों को मात्र सरकारी विभागों के हवाले रखने के कारण आम समाज इसके संरक्षण के प्रति उदासीन रहते हैं।कहते हैं अब समय आ गया है कि देश के नागरिकों को भी धरती और पर्यावरण के संरक्षण में प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदारी दे देनी चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here