ब्यूरोक्रेसी में हलचल, सीएम धामी की ‘हेलिकॉप्टर शॉट’ की तैयारी

 

आशीष तिवारी। उत्तराखंड की ब्यूरोक्रेसी में हलचल मची हुई है। मौजूदा वक्त में सीएम पुष्कर सिंह धामी न सिर्फ पूरे फार्म में बैटिंग कर रहें हैं बल्कि फ्रंट फुट पर ही खेल रहें हैं। सीएम के तेवर देख कर लगता नहीं है कि वो फिलहाल डिफेंसिव या बैकफुट पर जाने वाले हैं। ऐसे में ये तय मानिए कि आने वाले कुछ दिनों में कुछ ‘हेलिकॉप्टर शॉट’ दिखने वाले हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्हें अनुशासित पार्टी में अनुशासन के साथ ताजपोशी तो मिली लेकिन ताजपोशी के साथ ही ‘अनुशासित नाराजगी’ भी मिली। अब भले ही कोई खुल कर न कहे लेकिन ये सच है कि कई बुजुर्ग और बुजुर्ग टाइप के विधायकों के दिल में मुख्यमंत्री बनने का अरमान था। जो धामी के आने के साथ ही धड़ाम हो गया।

बुके नीति से डिनर डिप्लोमेसी तक

रूठने और मनाने के खेल में संगठन उलझा तो उलझन में धामी भी जरूर रहें होंगे। लेकिन ‘बुके नीति’ से शाम की बेला आने से पहले आधा काम किया और ‘डिनर डिप्लोमेसी’ का इस्तमाल कर खांटी राजनीतिक स्टाइल में धामी ने रात के साथ बात खत्म कर दी। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि पुष्कर सिंह धामी से नाराजगी की वजह तलाशने वाले जहां सोचना खत्म कर दे रहें हैं, धामी वहां से सोचना शुरु कर रहें हैं। शायद पुष्कर सिंह धामी के लिए सरकार में अब तक कभी न होने का ये ‘प्लस प्वाइंट’ हो कि उनमें रिस्क को ‘कैलकुलेटेड’ रखने का डर न हो। यही वजह है कि वो फ्री हैंड खेल रहें हैं।

प्यार, दुलार, मीठी छुरी से वार

पुष्कर सिंह धामी ने भले ही लखनऊ में राजनीति न की लेकिन उनकी राजनीति में ‘लखनउआ स्टाइल’ झलकता है। प्यार भी, नजाकत भी, दुलार भी और फिर भी बात न बने तो मीठी छुरी से वार भी। अब राज्य की ब्यूरोक्रेसी को लेकर लिए गए सीएम धामी के फैसले को ही ले लीजिए। कौन जानता था कि उत्तराखंड के सचिवालय के गलियारों के ऑलटाइम फेवरेट ओमप्रकाश की कुर्सी भी हिल सकती है। जिन ओमप्रकाश को हरीश रावत, त्रिवेंद्र और तीरथ जैसे नेता नहीं हिला पाए उन्हें पुष्कर धामी ने एक दिन में सचिवालय के गलियारों से ‘आजाद’ कर दिया। ये आजादी इसलिए भी अहम है क्योंकि ब्यूरोक्रेसी के बंद गलियारों में कई बार ताजी हवाओं की अकाल मौत हो जाती है। वो हवाएं जो चमोली, धारचुला, आराकोट, रुद्रप्रयाग, से उम्मीदों की पोटली बांधे देहरादून पहुंचती हैं। सचिवालय के गलियारों में लगी ‘फाइलों की पाइपलाइन’ ऐसी है कि जिसमें एक बार गुम होने के बाद बरसों बरस किसी उम्मीद को निकलने में लगते हैं।

राजनीतिक मोक्ष से तो बचा ही लेंगे

फिलहाल पुष्कर सिंह धामी ने अपने लिए मजबूत सिपाहसलार भी ढूंढा है। वो सिपाहसलार जो उनके लिए चुनावों का तारक मंत्र न लाए पाए तो कम से कम उन्हें ‘राजनीतिक मोक्ष’ की स्थिती से तो बचा ही लेगा। एस एस संधु उनकी आंख और कान के तौर पर सचिवालय में काम करेंगे ऐसी उनकी उम्मीद तो होगी ही। एसएस संधु की जो छवि है वो उन्हें तेजतर्रार तो बनाती ही है साथ ही ‘रिजल्ट ओरिएंटेड’ भी है।

वैसे मौजूदा दौर में सीएम धामी कुछ बेहतरीन शॉट्स लगाएंगे ये तय मानिए। फील्ड से कई ब्यूरोक्रेट्स की वापसी होने वाली है और गलियारों से निकल कर कई ब्यूरोक्रेट्स फील्ड में पहुंचने वाले हैं। पूरे घर को बदल डालूंगा वाले स्टाइल में कुछ बड़ा होने की पूरी पूरी संभावना। पुष्कर धामी इसे अपने क्रिया कलापों से साबित भी कर रहें हैं।

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