बच्चों को शिकार बना रहा है ब्लैक फंगस, यहां मिला केस

 

तेजी से फैलने वाला म्यूकोर्मिकोसिस, जिसे आमतौर पर ब्लैक फंगस के नाम से जाना जाता है, अब बच्चों को भी प्रभावित कर रहा है। गुजरात में दुर्लभ ब्लैक फंगस रोग जोकि कोविड-19 रोगियों को प्रभावित करता है, अब एक 15 वर्षीय व्यक्ति बच्‍चे में पाया गया है।

समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को बाल रोग विशेषज्ञ अभिषेक बंसल ने कहा, “अहमदाबाद में बाल चिकित्सा म्यूकोर्मिकोसिस का यह पहला मामला है।” अप्रैल में कोविड-19 बीमारी से सफलतापूर्वक उबरने के बाद लड़के को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।

डॉक्टर ने कहा, ”बाद में उन्हें म्यूकोर्मिकोसिस का पता चला।” समाचार एजेंसी एएनआई ने डॉक्टर के हवाले से बताया कि वह वर्तमान में स्थिर है और दो से तीन दिनों के बाद उसे छुट्टी दे दी जाएगी।

स्थानीय मीडिया ने बताया कि लड़के ने वायरल संक्रमण से उबरने के एक हफ्ते बाद लक्षणों की शिकायत की और उसका एप्पल चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था।

देश में कोविड-19 के प्रकोप के बीच उन रोगियों में ब्‍लैक फंगस के मामले सामने आए हैं, जो बीमारी के ठीक होने के चरण में थे। फंगल संक्रमण अधिक जानलेवा होता है और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले या सुगर जैसी बीमारी वाले लोगों पर हमला करता है।

इस बीमारी के परिणामस्वरूप सांस लेने में तकलीफ और खांसी के साथ खून भी आ सकता है। अन्य लक्षणों में नाक पर कालापन या मलिनकिरण, धुंधली या दोहरी दृष्टि और सीने में दर्द शामिल हैं।

डॉक्टरों को संदेह है कि म्यूकोर्मिकोसिस में अचानक वृद्धि को कोविड-19 रोगियों के इलाज के लिए स्टेरॉयड के तेजी से उपयोग से जोड़ा जा सकता है।

गुजरात के स्वास्थ्य अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि कोविड-19 से ठीक हुए 1,100 से अधिक म्यूकोर्मिकोसिस रोगियों का गुजरात के चार प्रमुख शहरों के सरकारी अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

सबसे ज्यादा 450 मरीज राजकोट सिविल अस्पताल में, 350 अहमदाबाद के मुख्य सिविल अस्पताल में, 110 के आसपास सूरत शहर के दो सरकारी अस्पतालों में और 225 मरीज वडोदरा शहर के सरकारी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं, जिनमें 148 मरीज एसएसजी अस्पताल में शामिल हैं।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने शुक्रवार को म्यूकोर्मिकोसिस के प्रकोप की रोकथाम में महत्वपूर्ण तीन कारकों को सूचीबद्ध किया।

समाचार एजेंसी एएनआई ने गुलेरिया के हवाले से कहा, “तीन कारक बहुत महत्वपूर्ण हैं: पहला, ब्‍लड शुगर के स्तर का अच्छा नियंत्रण, दूसरा, स्टेरॉयड लेने वालों को नियमित रूप से ब्‍लड शुगर के स्तर की निगरानी करनी चाहिए और तीसरा, स्टेरॉयड और उनकी खुराक के बारे में सावधान रहना चाहिए।”

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