उत्तराखंड से बड़ी खबर : होमगार्ड का शव बरामद, 27 जुलाई को उफनते गदेरे में बह गया था

अल्मोड़ा : बीते दिनों लगातार बारिश के कारण नदी नाले उफान पर थे। इस बीच खबर आई थी कि एक होमगार्ड उफनते नाले में बह गया जिसकी स्कूटी बरामद की गई थी लेकिन होमगार्ड लापता हो गए थे। वहीं इतने दिन बीत जाने के बाद आज अल्मोड़ा की रामगंगा नदी में जैनल के निकट होमगार्ड राकेश किरौला का शव बरामद हुआ है। इस खबर से होमगार्ड के परिवार में कोहराम मचा हुआ है। वहीं विभाग में शोक की लहर है।

आपको बता दें कि होमगार्ड राकेश किरौला 27 जुलाई को नागाड़ गधेरे को पार करते समय बह गए थे। उनकी स्कूटी मौके से बरामद की गई थी। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ द्वारा सर्च अभियान चलाया गया लेकिन होमगार्ड का कुछ पता नहीं चल पाया थालेकिन अब 18-19 दिन बाद होमगार्ड का शव रामगंगा में बरामद हुआ है। जानकारी मिली है कि रामगंगा नदी के पास से गुजर रहे खच्चर वाले की शव पर नजर पड़ी थी और खच्चन वाले ने इसकी जानकारी अन्य लोगों औऱ फिर पुलिस को दी। पुलिस ने जानकारी दी है कि होमगार्ड के शरीर में शर्ट नहीं थी। लेकिन होमगार्ड की पहचान बेल्ट और यूनिफॉर्म की पेंट से की गई है। इस खबर से होमगार्ड के परिवार में कोहराम मच गया है।

बता दें कि चौखुटिया के बरसाती नागाड़ गदेरे में स्कूटी सवार होमगार्ड 27 जुलाई को बह गया था। उस दिन होमगार्ड सुबह तड़के ड्यूटी कर अपने गांव लौट रहा था। होमगार्ड 100 मीटर दूर स्कूटी बरामद की गई थी। पुलिस व ग्रामीणों ने भिकियासैंण तक सर्च अभियान चलाया गया था। सडीआरएफ के गोताखोरों ने भी ऑपरेशन शुरू किया था।

8 महीने पहले हुआ था भर्ती

जानकारी मिली है कि सौनगांव राकेश किरौला (24) ड्यूटी पूरी करने के बाद स्कूटी से घर की ओर निकला था। रातभर भारी बारिश से नागाड़ गदेरा उफान पर था। अंधेरा होने के कारण राकेश तेज बहाव का अनुमान नहीं लगा पाया। गदेरा पार करते वक्त तेज बहाव में बह गया था। ग्रामीणों की सूचना पर तहसीलदार हेमंत कुमार मेहरा और एसओ अशोक कांडपाल राहत व अचाव दल लेकर पहुंचे थे। राकेश सिंह 8 माह पूर्व ही होमगार्ड में भर्ती हुआ। वह परिवार में सबसे छोटा है। बड़ा भाई उमेश सिंह किरौला बीएसएनएल अल्मोड़ा में कार्यरत है। सुबह करीब साढ़े पांच बजे आसपास ही रहने वाले राजेंद्र कुमार व चंदन प्रसाद रोज की तरह दौड़ के लिए निकले। रामगंगा क्षेत्र में दूर उन्होंने जलमग्न स्कूटी की बैकलाइट जली देखी। जोखिम उठाकर दोनों मौके पर पहुंचे। स्कूटी का नंबर पहचाना तो ग्रामीणों को बताया। तब राकेश की तलाश शुरू की गई।

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