पुस्तकालय की जगह बारातघर, निजी आवास और धर्मशाला, हाईकोर्ट ने भेजा मदन कौशिक को नोटिस

नैनीताल : इन दिनों उत्तराखंड में दो मुद्दे गर्माए हुए हैं…पहला कुंभ में टेस्टिंग घोटाला और दूसरा कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक पर लगे पुस्तकालय के नाम पर भ्रष्टाचार करने का आरोप…बता दें कि इन दोनों मुद्दों को लेकर विपक्ष भी पूरी भाजपा सरकार पर हमला वर है। इसकी गूंज केंद्र तक जा पहुंची है। बता दें कि हाई कोर्ट ने बुधवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक पर पुस्तकालय निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप लगाती जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने इसमें कौशिक, विभागीय इंजीनियर रामजी लाल व अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर आपत्ति दाखिल करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 30 जून को होगी।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में हरिद्वार निवासी सच्चिदानंद डबराल की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में कहा गया है कि हरिद्वार विधायक रहते हुए मदन कौशिक ने वर्ष 2010 में अपनी निधि से 16 पुस्तकालयों के निर्माण के लिए डेढ़ करोड़ रुपये जारी किए। लेकिन आज तक संबंधित पुस्तकालय नहीं बनाए गए। हालांकि इस मद में डेढ़ करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया।

मदन कौशिक ने जिन जगहों पर पुस्तकालय का जिक्र किया है वहां पर बारातघर, निजी आवास व धर्मशालाएं हैं। इस मामले में कार्यदायी संस्था ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (आरईएस) रही। उसके तत्कालीन इंजीनियर ने बिना अस्तित्व में आए ही पुस्तकालयों का निरीक्षण किया। उसी रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन सीडीओ ने डेढ़ करोड़ रुपये का पूरा भुगतान कर दिया। पूरे मामले को सुनने के बाद कोर्ट ने मदन कौशिक, विभागीय इंजीनियर रामजी लाल व अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर दिया।

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