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‘कोर्ट के सामने गटर में बहा देना अस्थियां…’ रुला देगी 24 पन्नों के सुसाइड नोट में लिखी Atul Subhash की दुख भरी दांस्ता

आपने सनी देओल की मूवी का डायलॉग तारीख पर तारीख तो सुना ही होगा। जिसमें वो कहते हुए नजर आते है कि “तारीख पे तारीख, तारीख पे तारीख, तारीख पे तारीख मिलती रही है लेकिन इंसाफ नहीं मिला माई लॉर्ड, इंसाफ नहीं मिला, मिली है तो सिर्फ ये तारीख।” ऐसी ही एक कानून व्यवस्था की भेंट बेंगलुरु के अतुल सुभाष चढ़ गए हैं।

अतुल (Atul Subhash) की इस दुख भरी कहानी आपको रूला देगी। पत्नी (nikita singhania) के कई गंभीर आरोपों और कोर्ट की तारीखों से तंग आकर अतुल ने अपनी जान दे दी। वो इतना प्रताड़ित हो गए थे कि उन्होंने आत्महत्या करने से पहले 40 पन्नों का सुसाइड नोट, करीब 1:30 घंटे की वीडियो बनाई है। जिसे पढ़कर और सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी। चलिए उनकी कहानी को जानते है।

Atul Subhash की पत्नी ने उनपर लगाए गंभीर आरोप

बेंगलुरु के रहने वाले अतुल सुभाष की शादी उत्तर प्रदेश के जौनपुर की निकिता सिंघानिया से हुई। शादी के बाद उन्होंने पत्नी के साथ प्यार से रहने के सपने बुने। लेकिन उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनकी पत्नी उनके साथ ऐसा कुछ करेगी। शाद के कुछ दिनों तक सब कुछ ठीक चल रहा था। लेकिन अचानक एक दिन उनकी पत्नी निकिता वापस जौनपुर लौट आई। पत्नी ने अपने पति और उसके घरवालों के खिलाफ दहेज और घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कर दिया।

अतुल ने वीडियो और सुसाइड नोट में लिखा ये (Atul Subhash Suicide Video)

अतुल सुभाष ने मरने से पहले एक वीडियो और सुसाइड नोट छोड़ा है। वीडियो में उन्होंने अपनी मौत का जिम्मेदार पत्नी निकिता सिंघानिया, साला अनुराग सिंघिया उर्फ पीयूष सिंघानिया, सास निशा सिंघानिया और चचेरा ससुर सुशील सिंघानिया को ठहराया है। अतुल ने आगे बताया कि पैसो के लिए उसकी पत्नी और ससुराल वालों ने उसे झूठे केस में फंसाया। ये वीडियो देखकर आप ये सिखेंगे कि कैसे एक लड़की कानूनू व्यवस्था का दुरुप्रयोग कर आपको और आपके परिवार को बर्बाद कर सकती है।

2 साल में 120 तारीखें लगी केस पर

वीडियो में उन्होंने आगे कहा कि कोर्ट में चल रहे केस की 120 डेट्स लग चुकी है। इन डेट्स के चलते 40 बार वो खुद बेंगलोर से जौनपुर के चक्कर लगा चुके है। इसके साथ ही उनके माता पिता को भी कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ज्यादातर डेट्स पर कोर्ट में कुछ नहीं किया जाता। कभी हड़ताल होती है तो कभी जज ही नहीं होता। दोनों पक्ष में से कोई सा भी वकील अगली डेट की डिमांड रख सकता है। उन्हें केवल 23 छुट्टियां साल की मिलती थीं। इस न्याय सिस्टम से वो थक गए थे।

निचली अदालत से लेकर हाई कोर्ट तक में केस दर्ज

सुसाइड नोट में अतुल ने लिखा कि उनकी पत्नी ने लोअर कोर्ट में छह और हाई कोर्ट में तीन केस डाले। पत्नी ने उनके माता-पिता और भाई के ऊपर हत्या, हत्या का प्रयास, घरेलू हिंसा, दहेज आदि जैसे झूठे इल्जाम लगाए थे। इन सभी इल्जामों की धाराओं में बेल मिलना मुश्किल है। एक केस में उनकी पत्नी ने आरोप लगाया कि साल 2019 में उनके परिवार ने दहेज में 10 लाख रुपए की मांग की। इस सदमे से उनके पिता की मौत हो गई। हालांकि क्रॉस एग्जामिनेशन में ये पता चला कि निकिता के पिता को हार्ट की बीमारी थी। इसी के चलते उनकी मौत हुई। इसी बीमारी के कारण ही शादी जल्दबाजी में की गई थी।

पत्नी द्वारा अजीबोगरीब सेक्स डिमांड

अतुल की वीडियो के मुताबिक, 2022 में उनकी पत्नी ने अतुल के परिवार पर केस कर दिया। इस वीडियो में अतुल ने अपनी शादीशुदा जिंदगी के बारे में बताते हुए कहा कि उनकी पत्नी सेक्स संतुष्टि के लिए उनसे अजीबोगरीब डिमांड करती थी। जिसके चलते वो अपनी पत्नी से दूरी बनाने लगे। उनकी पत्नी ने तलाक के बदले हर महीने दो लाख रुपए के गुजारे भत्ते की डिमांड की। उसने बच्चे को भी उनसे मिलते नहीं दिया।

जज पर लगाए ये आरोप

इसके साथ ही जौनपुर की प्रिंसिपल फैमिली कोर्ट जज पर भी अतुल ने आरोप लगाया है कि डेट के लिए उन्हें पेशकार को घूस देनी पड़ती है। साथ ही उन पर करीब तीन करोड़ के मेंटिंनेस का दबाव कोर्ट में जज द्वारा बनाया गया। दिसंबर 2024 में केस सेटल के लिए पांच लाख रुपए की भी डिमांड रखी गई। अतुल ने जब जज के सामने ये बात रखी कि उनकी पत्नी उन्हें आत्महत्या के लिए उकसा ही है, तो जज हंस पड़े। अतुल के मुताबिक साल 2022 में भी पेशकार के जरिए उनसे तीन लाख रुपए की मांग की गई थी। घूस ना देने पर एलमनी और मेंटिनेंस ऑर्डर जारी किए गए। जिसमें उन्हें 80 हजार रुपए हर महीने के देने थे।

न्याय ना मिलने पर कोर्ट के आगे गटर में बहा देना अस्थियां

अतुल ने जूडिशियरी से उनके माता-पिता को हैरेस ना करने की अपील भी की है। साथ ही उन्होंने ये कहा कि उनके बच्चों की अच्छी परवरिश हो, इसके लिए उन्हें माता-पिता को सौंप दिया जाए। साथ ही भाई को भी बिना कैमरे पत्नी और उसके परिवार वालों से ना मिलने की हिदायत दी है। आखिर में उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें परेशान करने वालों को सजा नहीं मिल जाती, उनकी अस्थियां विसर्जित ना कि जाए। न्याय ना मिलने पर उनकी अस्थियां कोर्ट के सामने गटर में बहा देना।

Uma Kothari

उत्तराखंड की डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय उमा कोठारी खबर उत्तराखंड (khabaruttarakhand.com) में बतौर पत्रकार कार्यरत हैं। वे राजनीति, मनोरंजन, खेल और ट्रेंडिंग विषयों पर गहन और तथ्यपरक खबरें लिखती हैं। उत्तराखंड के स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों पर इनकी पकड़ मजबूत है। डिजिटल मीडिया में इनका अनुभव पाठकों को सटीक, संतुलित और समय पर जानकारी देने में सहायक है। उत्तराखंड | खबर उत्तराखंड
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