Asha Bhosle ने इस पहाड़ी गाने को दी आवाज, सुबोध उनियाल से जताई ये अधूरी इच्छा

रविवार, 12 अप्रैल 2026 को दिग्गज गायिका आशा भोसले(Asha Bhosle Death) का निधन हो गया। उनके जाने से पूरा देश शोक में हैं। हालांकि उत्तराखंड का दर्द कुछ अलग है। प्रदेश के संगीत प्रेमी और रंगकर्मी भी काफी दुखी हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि आशा ताई ने सिर्फ हिंदी नहीं बल्कि हमारी गढ़वाली बोली में भी सुर दिए थे। उनका उत्तराखंड से एक काफी खास रिश्ता रहा है जो काफी कम लोगों को ही पता होगा।
चलिए इस आर्टिकल में जानते है आशा ताई का उत्तराखंड से बहुत कम जाना-पहचाना रिश्ता। साथ ही जानते है उनकी एक अधूरी इच्छा के बारे में जिसके लिए उन्होंने मंत्री सुबोध उनियाल से भी निवेदन किया था।

आशा भोसले- एक युग का अंत Asha Bhosle End of an Era
एक नाम जो भारतीय संगीत में आने वाले कई दशकों तक लिया जाएगा। आशा भोसले के जाने से एक युग का अंत हुआ है। हजारों गीत, दर्जनों भाषाएं, और करीब छह दशक से ज्यादा के इस सफर में उन्होंने एक पहाड़ी गीत को भी अपनी मधुर आवाज दी थी।
दरअसल ये बात है साल 1989 की, पहली गढ़वाली फीचर फिल्म बन रही थी। उस समय नाम रखा गया था ‘ग्वेर छ्वारा’। हालांकि बाद में इसका नाम ‘जन्मों कू साथ’ रखा गया।

गढ़वाली फिल्म के लिए मेकर्स आशा जी के घर पहुंचे
इसी फिल्म के गाने के लिए प्रोड्यूसर बंसत घिल्डियाल, म्यूजिक डायरेक्टर और टीम Asha Bhosle के घर पहुंची। आशा जी ने पूछा, कहां से हो?, और जब टीम ने बदरीनाथ का नाम लिया तो इसे सुनकर तुरंत वो गाने के लिए तैयार हो गई। आशा जी ने कहा कि वैसे तो उन्होंने कई भाषाओं में गाया है। लेकिन वो इस गढ़वाली गीत को गाने से पहले उसका अर्थ जानना चाहती हैं।
आशा भोसले ने इस पहाड़ी गाने को दी आवाज Asha Bhosle Sung Gadhwali Song
जब उन्हें बताया गया कि ये विरह का गीत है, तो उन्होंने पूरी आत्मा से वो गीत गाया। आधे घंटे में ही गीत रिकार्डिंग पूरी कर ली गई थी। गीत था “जन्मों कू साथ छ यो, किलै तिन तोड़ी…” ये गीत गाकर आशा जी ने अपनी आवाज से फिर्म में जान डाल दी थी।
जब गाने के लिए फीस की बात आई तो आशा जी ने बड़ी ही सरलता से कहा हिंदी फिल्म का 50 हजार लेती हूं, तुम पहाड़ से आए हो, तुमसे केवल 25 हजार लूंगी। हालांकि आशा जी का उत्तराखंड से नाता यहीं खत्म नहीं हुआ।

नैनीताल से भी गहरा नाता
नैनीताल (Nainital) से भी उनका गहरा नाता था। “अभी तो जी ले”, “वक्त” और “गुमराह” जैसी फिल्मों के कई गाने नैनीताल की खूबसूरत वादियों में फिल्माए गए थे। ओ लाली है तू सवेरे वाली, दिन है बहार के, तेरे मेरे इकरार के और इन फिजाओं में गानों भी नैनीताल में फिलमाए गए। जिनको आशा जी ने अपनी आवाज दी। इसके अलावा भी उन्होंने यहां फिल्माए कई गीतों को गाया।

हरिद्वार से जुड़ी आशा भोसले की ये इच्छा रह गई अधूरी
भले ही वो कभी यहां आईं नहीं। लेकिन यहां पर फिल्माए गए उनके कई गीत आज भी वादियों में गूंजते हैं। गीतों के अलावा आशा जी के मन में एक और इच्छा थी, जो अब अधूरी रह गई। करीब दो साल पहले मुंबई के यशराज स्टूडियो में आशा जी की उत्तराखंड उर्दू अकादमी के पूर्व अध्यक्ष अफजल मंगलौरी से मुलाकात हुई। जब आशा जी को पता चला कि वो हरिद्वार से हैं, तो वो बहुत खुश हो गई। उस दिन उन्होंने कहा था “मैं हरिद्वार आना चाहती हूं। गंगा किनारे बैठकर मां गंगा की आरती और स्तुति गाना चाहती हूं।”
अधूरी इच्छा के लिए मत्री सुबोध उनियाल से किया निवेशन
आपको बता दें कि इसके लिए उन्होंने कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल से भी अनुरोध किया था कि उन्हें कुंभ के समय हरिद्वार आमंत्रित किया जाए, लेकिन उनकी ये इच्छा अधूरी रह गई। दुनिया भर के मंचों पर आशा भोसले ने अपनी आवाज का जलवा बिखेरा है लेकिन उनके मन में उत्तराखंड के लिए एक अहल ही चाह थी। बदरीनाथा का नाम सुनकर तुरंत उनका गाने को तैयार हो जाना और गंगा आरती गाने की उनकी अधूरी इच्छा।
आशा भोसले को पहाड़ रखेगा याद
ये छोटी-छोटी बातें ही इस बात का सबूत है कि स्वरों की मल्लिका के दिल में पहाड़ और गंगा के प्रति कितना सम्मान और प्यार था। भले ही आज वो सुर नहीं रहा, वो हमें छोड़कर चली गई हो लेकिन उत्तराखंड, आशा ताई को हमेशा याद रखेगा।