टिहरी बांध के किनारे बनी अवैध मस्जिद का सूपड़ा साफ, लोगों ने ली राहत की सांस

टिहरी : आखिरकार प्रशासन ने टिहरी बाँध के पास बनी अवैध मस्जिद को हटा दिया गया है। टिहरी के लोगों की जीत हुई है। उत्तराखंड में दिन-बा-दिन ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं जिसका स्थानीय लोग जमकर विरोध कर रहे हैं। ऐसा ही मामला बदरीनाथ से भी सामने आया था, जहां एक वीडियो वायरल कर दिवा किया गया था कि बदरीनाथ में नमाज पढ़ी गई है. इस वीडियो से मुद्दा गरमा गया था। बदरीनाथ से विधायक महेंद्र भट्ट हमेशा से ही ऐसी गतिविधियों का विरोध करते आए हैं।वहीं टिहरी में बनी अवैध मस्जिद का वीडियो जमकर वायरल हुआ था। स्थानीय लोगों ने जमकर हंगामा किया था। ये मुद्दा सोशल मीडिया पर भी गर्माया। स्थानीय लोग और हिंदू संगठन इसे हटाने की माँग कर रहे रहे थे। इसकी प्रशासन से शिकायत की गई और 30 सितंबर को अधिकारियों ने खंड-खाला कोटि कॉलोनी में बनी इस अवैध मस्जिद को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी थी जिसके बाद वहां से मस्जिद पूरी तरीके से हटा दी गई है।

ट्विटर पर हैशटैग के साथ विरोध किया था ट्रेंड

आपको बता दें कि टिहरी का वीडियो सोशल मीडिया पर हैशटैग #RemoveTehriMosque ट्रेंड करने लगा था। नेटिजन्स ने अवैध मस्जिद को हटाने के लिए स्थानीय लोगों की माँग को और अधिक आवाज दी। त्वरित कार्रवाई के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को टैग भी किया। 30 सितंबर को मस्जिद तोड़ने की कार्रवाई शुरू हुई और शाम होते होते सूपड़ा साफ कर दिया गया। इस कार्रवाई की वीडियो और फोटो भी वायरल हुई जिससे स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली और खुशी जाहिर की।

आज से 20 साल पहले हुआ था मस्जिद का निर्माण

मिली जानकारी के अनुसार 2000 के दशक की शुरुआत में बाँध बनाने वाली कंपनी जेपी ने मुस्लिम मजदूरों के लिए एक अस्थायी मस्जिद का निर्माण किया था। परियोजना के पूरी होने के बाद कंपनी और मजदूर चले गए, लेकिन अस्थायी मस्जिद को जस का तस रहने दिया। इस अवैध ढाँचे को हटाने के लिए पहले भी स्थानीय नेताओं, हिंदू संगठनों और लोगों ने कई बार आवाज उठाई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। स्थानीय लोगों ने कहा कि हर शुक्रवार को सैकड़ों मुसलमान यहाँ नमाज अदा करने आते हैं। नमाज अदा करने के बाद ज्यादातर लोग सड़क पर ही बैठ जाते हैं। पास में ही एक कॉलेज है और इस सड़क से अक्सर मोहल्ले की महिलाएँ गुजरती हैं। खासकर शुक्रवार को इलाके में उत्पीड़न के अनगिनत मामले सामने आए हैं, जहाँ सौ से ज्यादा मुस्लिम सड़क के किनारे बैठे रहते हैं। हमने कई बार शिकायत की है, लेकिन कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं है।

30 सितंबर को मस्जिद हटाई गई

मस्जिद को हटाने की माँग के लिए सितंबर 2021 के पहले सप्ताह में अक्षत और हिंदू संगठनों के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने मस्जिद के खिलाफ फिर से विरोध शुरू किया।इसके बाद जिला प्रशासन और जमीन के मालिक पर्यटन विभाग ने पहले ही निरीक्षण कर अवैध मस्जिद को हटाने का आदेश दिया। इस क्षेत्र को दूसरे सभी अवैध ढाँचों को पहले ही हटा दिया गया था, लेकिन मस्जिद को नहीं हटाया गया था। लेकिन बता दें कि 30 सितंबर को मस्जिद को हटा दिया गया औऱ सारा सामान भी वहां से शिफ्ट किया गया.

बदरीनीथ मंदिर में हुआ था नमाज पढ़ने का कथित वीडियो वायरल

आपको बता दें कि बीते साल बदरीनाथ मंदिर में कुछ मुसलमानों द्वारा कथित तौर से नमाज पढ़े जाने का वीडियो वायरल हुआ था जिसके बाद यहां तनाव की स्थिति बन गई थी। बदरीनाथ विधायक ने भी इसका जमकर विरोध किया। कहा गया कि ईद-उल-अजहा के मौके पर प्रसिद्ध बदरीनाथ मंदिर परिसर में कुछ मुसलमानों ने कथित तौर से नमाज अदा की गई जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।

लेकिन चमोली पुलिस अधीक्षक यशवंत सिंह चौहान ने इस घटना पर कहा कि ‘सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हुआ है उसमें नजर आ रहा है कि कई मुसलमान बदरीनाथ मंदिर परिसर में नमाज अदा कर रहे हैं।’ पुलिस अधीक्षक ने जानकारी दी है कि वायरल पोस्ट पर नजर पड़ते ही स्थानीय पुलिस की एक टीम तुरंत इन आरोपों की जांच में जुट गई। पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।

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