एक झटके में गवाए 11 लाख करोड़!, Elon Musk अब नहीं रहे ट्रिलियनेयर

Elon Musk: हाल ही में एलन मस्क दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बने थे। अब मस्क को बड़ा झटका लगा है। ट्रिलियनेयर बनने का उनका ये छोटा सा दौर खत्म हो गया है। SpaceX (SPCX) और Tesla (TSLA) के शेयरों में भारी गिरावट आई है। जिसके असर उनकी संपत्ति पर देखने को मिला। ऐसे में उनका दुनिया के इकलौते ‘ट्रिलियनेयर’ होने का दौर खत्म हो गया।
एक झटके में Elon Musk ने गवाए 11 लाख करोड़!
ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, बुधवार को मस्क की नेट वर्थ गिरकर 946 बिलियन डॉलर के करीब पहुंच गई। अभी दो हफ्ते से भी कम समय में 12 जून को उनकी नेटवर्थ 1.11 ट्रिलियन डॉलर थी। तो वहीं ये बढ़कर 1.32 ट्रिलियन डॉलर तक भी गई थी। जिसमें उन्होंने दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर का रिकॉर्ड बनाया था।
ये भी पढ़ें:- दुनिया के पहले खरबपति बने एलन मस्क, कई देशों की GDP से भी ज्यादा अमीर
एलन मस्क अब नहीं रहे ट्रिलियनेयर
हालांकि शेयर्स में गिरावट की वजह से अब मस्क ट्रिलियनेयर नहीं रहे। हालांकि अभी भी उनकी नेटवर्थ दुनिया के बाकी अमिर व्यक्ति से ज्यादा है।
SpaceX के शेयर क्रैश
स्पेसएक्स के शेयर 16 जून को अपने ऑल-टाइम हाई 225.64 डॉलर के स्तर पर पहुंच गए थे। जिससे कंपनी की मार्केट कैप 2.5 ट्रिलियन डॉलर के पार थी। हालांकि स्पेसएक्स के शेयर इस हफ्ते 30% तक लुढ़के। जिससे ये 154-156 डॉलर के दायरे आ गए।
अकेले सोमवार की बात करें तो इनमें 16% तक की गिरावट दर्ज हुई। जिससे मस्क की नेटवर्थ में से 240 बिलियन डॉलर साफ हो गए। तो वही बीते दिनों की बात करें तो इनमें 6-9% तक की गिरावट आई। जिससे ये टूटकर 375.53 डॉलर के स्तर पर आ चुके हैं।
क्यों गिरे SpaceX के शेयर?
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, स्पेसएक्स ने आईपीओ के तुरंत बाद ही अंतरिक्ष में नए डेटा सेंटर और एआई संबंधित परियोजनाओं के लिए 25 बिलियन डॉलर के बॉन्ड्स बेचने का ऐलान किया। जिससे निवेशक सतर्क हो गए।
दरअसल कंपनी एआई सेक्टर में आगे बढ़ने के लिए कंपनी ने Cursor AI नाम की स्टार्टअप को 60 अरब डॉलर में खरीदने का सौदा किया। जिसका भुगतान स्पेसएक्स के नए शेयर जारी करके किया जाएगा। जिससे मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी करीब 3.4% तक घट गई।
निवेशकों को किस बात का डर?
निवेशकों को चिंता है कि एआई पर भारी पैसा खर्च किया जा रहा है। लेकिन इससे कमाई होने में अभी काफी समय लग सकता है। इसी डर की वजह से कई बड़ी टेक कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली है।