हिंसा हुई नहीं, भड़काई गई!, 300 गिरफ्तार और 7 FIR, पुलिस जांच में कई खुलासे

Noida Violence Workers Protest For Salary Hike: सोमवार को उत्तर प्रदेश के नोएडा में हजारों की संख्या पर लोग सड़कों पर उतर आए। जहां वो काम करते है उन्हीं फैंक्ट्रियों में तोड़फोड़ करने लगे। इसी को लेकर पुलिस ने जांच की। जिसमें अब कई खुलासे हो रहे हैं। कहा जा रहा है कि नोएडा में जो हिंसा प्रदर्शन हुआ, उसमें शामिल लोग मजदूर थे ही नहीं। व्हाट्सएप ग्रुपों में हिंसा भड़काने का काम किया गया। तो क्या हिंसा नहीं हुई बल्कि करवाई गई थी?
नोएडा में बवाल के बाद एक्शन Noida Violence Workers Protest For Salary Hike
आपको बता दें कि नोएडा सेक्टर-63 में मारुति सुजुकी के वर्कशॉप में प्रदर्शनकारियों ने वहां कार में आग लगा दी थी। तो वहीं कई कारों के शीशे भी तोड़े। पुलिस थाने पर भी पत्थरबाजी की गई। सेक्टर-15 के पास लोगो ने एक्सप्रेस-वे जाम किया। सेक्टर-62 में कर्मचारियों ने नेशनल हाइवे को जाम किया गया।

7 थानों में FIR, 300 लोग गिरफ्तार
अब तक पुलिस ने 300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में ले लिया है। तो वहीं कई सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी FIR की गई है। पुलिस की माने तो 80 से ज्यादा जगहों पर हिंसा हुई हैं। करीब 42 हजार लोग प्रदर्शन में शामिल थे। सात थानों में एफआईआर दर्ज की गई है।
रातोंरात WhatsApp ग्रुपों में लोगों को किया गया एड
पुलिस जांच में सामने आया कि नोएडा में विरोध प्रदर्शन में WhatsApp ग्रुपों का भारी संख्या में इस्तेमाल किया है। ग्रुप प्रदर्शनकारियों को जुटाने और हिंसा को बढ़ाने के लिए यूज हुआ। क्यूआर कोड के जरिए लोगों को ग्रुपों में जोड़ा गया। रातोंरात इन ग्रुपों में बड़ी संख्या में लोगों को शामिल किया गया। ग्रुपों के अलग-अलग नाम थे, जिससे शुरुआत में इनकी पहचान करना मुश्किल हो गया।
भड़काऊ पोस्ट से मजदूरों को उकसाया!
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ‘मजदूर आंदोलन’ के नाम से एक ग्रुप बनाया गया। जिसमें मजदूर संगठनों और समूहों को जोड़ा गया। लगातार मैसेज भेजे गए जिनमें लोगों को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाया गया। ग्रुप में भड़काऊ पोस्ट शेयर किए गए। जिससे भीड़ उकसे और आक्रामक बने। कुछ में तो गलत जानकारी और अफवाहें भी फैलाई गईं।
रणनीति के तहत हुआ विरोध प्रदर्शन
पुलिस की माने तो गिरफ्तार हुए आरोपियों के मोबाइल की जांच के समय कई अहम सबूत मिले। अधिकारियों की माने तो ये एक सुनियोजित रणनीति के तहत की गई साजिश लग रही है। पुलिस द्वारा इन ग्रुपों के एडमिन और ऑपरेटर्स की पहचान की जा रही है।