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उत्तराखंड: अब राजधानी में रहेगी जूली, विदा करते वक्त भर आई आंखें

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चमोली : मानव-वन्यजीव संघर्ष वर्तमान में सबसे बड़ी चिंताओं में शामिल है। नेशनल पार्कों के आसपास के इलाके हों या फिर ग्रामीण क्षेत्र। हर कहीं वन्यजीव लोगों पर हमला कर रहे हैं। खासकर गुलदार और हाथी, सबसे बड़ा खतरा बने हैं। इसके अलावा जो हिंसक जानवर नहीं हैं, उनकी तस्करी के मामले भी सामने आते रहे हैं। लेकिन, इन सबके बीच चमोली के केवर गांव के दर्शन लाल और उनकी पत्नी उमा देवी ने मानव-वन्यजीवों के संबंध को पिता-पुत्री और माता-पुत्री का संबंध बना दिया।

दर्शन लाल और उमा देवी डेढ़ साल तक जूली (हिरन प्रजाति की घुरड़) को अपने घर में, अपने परिवार के साथ केवल रखा ही नहीं, बल्कि उसे बच्चे की तरह पाला। अपने साथ सुलाया। खाना खिलाया। अपने हाथां से दूध पिलाया। लेकिन, अब जूली उनसे दूर होकर राजधानी देहरादून के मालसी डियर पार्क में रहेगी। जूली की इस विदाई की बेला पर उसे अपने बच्चे की तरह पालकर बडा करने वाले दंपति अपने आंसू नहीं रोक पाए।

जूली (हिरन) की ये कहानी 4 मार्च 2020 की एक सुबह शुरू हुई। जंगल घास लेने गई जूली उमा देवी को जंगल में पड़ी मिली। उमादेवी ने समझा कि हिरन का बच्चा अभी अभी पैदा हुआ है, इसलिए वह उसे वहीं छोडकर घास लेकर घर आ गईं। दूसरे दिन जब उमादेवी फिर से जंगल गई तो, उसे हिरन का बच्चा बेसुध अवस्था में उसी जगह पर पडा दिखा। उमादेवी ने आशंका जताई कि हो न हो उसकी मां हिरनी के साथ कोई अप्रिय घटना घट गई हो। उसकी ममता जाग उठी और घास काटना छोड़कर नवजात हिरन को घर ले आई।

केवर गांव के दर्शन लाल और उनकी पत्नी उमादेवी बताती हैं कि उन्होंने उसका नाम जूली रखा। वह उनके बच्चों की तरह ही उनके साथ खाती-पीती और सोती है। अब जूली 17 माह की हो गई, तो उनको चिंता सताने लगी कि कोई जूली को हानि पहुंचा सकता है। दोनों ने अपनी भावनाओं को काबू करते हुए उसे वन विभाग को सौंपने का फैसला लिया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जूली घरेलू हो गई है और वह जंगल में नहीं रह पायेगी। जंगल में वह किसी का भी आसानी से शिकार बन जायेगी। इसलिए उन्हें उसकी चिंता भी सता रही हैं।

दोनों पति-पत्नी बद्रीनाथ वन विभाग के रेंज कार्यालय पहुंचे और जूली को किसी सुरक्षित स्थान पर रखने का आग्रह किया। विभाग ने भी तुरंत इसके लिए अपने उच्चाधिकारियों से पत्राचार कर जूली की व्यवस्था करने की मांग की। बद्रीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ आशुतोष सिंह ने बताया कि उन्होंने मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक से जूली को सुरक्षित स्थान पर भेजे जाने के लिए अनुमति मांगी है।

देहरादून जू मालसी डियर पार्क में जूली को रखने की अनुमति मिलते ही उसे देहरादून के लिए रवाना कर दिया गया। डीएफओ ने बताया कि जूली को विभाग के विशेष वाहन से रेंजर भगवान सिंह परमार और वन दरोगा बलबीर लाल सोनी की देखरेख में भेजा गया।

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