घर में चल रही थी शादी की तैयारी, तिरंगे में लिपटे पहुंचे 25 साल के सचिन, छोटा बेटा भी सेना में

देहरादून : चमोली के नारायणबगड़ ब्लॉक के कंडवाल गांव के लाल सचिन कंडवाल आज शुक्रवार को सड़क दुर्घटना में शहीद हो गए हैं। उनका पार्थिव शरीर दोपहर को उनके घर लाया गया और सैन्य सम्मान के साथ सचिन का अंतिम संस्कार किया गया। बता देें कि जैसे ही देहरादून स्थित घर पर सचिन का पार्थिव शरीर पहुंचा तो मां बेसुध हो गयी। मां ताबूत पर ऐसे हाथ फेरने लगी जैसे कि बेटे को उठा रही हो। भाई रिश्तेदार जोर जोर से ताबूत में हाथ मारने लगे। परिवार वालों की चीख पुकार मच गई। सचिन की दादी जोर जोर से रोने लगी। पड़ोसियों ने उनको संभाला। मां बेसुध हो गए और मेरा सोनू मेरा सोनू चिल्लाने लगी। पिता बार बार यही बोलते रहे कि बेटा सोनू उठ जा, उठ जा जल्दी। बहन जो की फार्मासिस्ट है, ताबूत के पास बैठकर लिपटकर रोने लगी।

हाल ही में हुई थी सगाई 

आपको बता दें कि सचिन कंडवाल की हाल ही में सगाई हुई थी। सचिन के घर पर सिर पर सहरा बांधने की तैयारियां चल रही थी। लेकिन किसे पता था कि बेटा ताबूत में लिपटा पहुंचेगा। सचिन की दादी, मां, पिता, भाई और बहन चीख चीख कर रोने लगे। पिता ने सबको संभाला। सबके मूंह से एक ही बात निकली कि सोनू उठ जा अब। लेकिन हर सोनू अब कभी नहीं उठेगा। सचिन को आज सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।

सचिन घर आए थे छुट्टी, फोन कर जल्दी बुलाया गया ड्यूटी पर

सचिन कंडवाल 55 बंगाल इंजीनियरिंग में कार्यरत थे और कुछ समय पहले ही वे घर छुट्टी आए थे। उन्हें फोन कर जल्दी बुला लिया गया। सचिन वापस ड्यूटी ज्वाइन करने जा रहे थे। आज तड़के सुबह उनकी सड़क हादसे में मौत हो गई है। 25 साल के सचिन की जिंदगी का अंत इतनी कम उम्र में और इतना जल्दी होगा यह किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। कुछ ही महीनों पहले तो उनकी सगाई तय हुई थी। कुछ ही महीनों बाद वे शादी के पवित्र बंधन में बंधने जा रहे मगर उससे पहले ही उनकी मौक की खबर घर पहुंची। बता दें कि सचिन कंडवाल के छोटे भाई भी सेना में है।

पिता बोले-बेटे की शहादत पर गर्व

सचिन के पिता ने फफकते हुए कहा कि उन्हें बेटे की शहादत पर गर्व है। बार बार पिता के मुंह से भी एक ही शब्द निकल रहा था कि सोनू बहुत हो गया अब उठ जा…उठ जा सोनू…माहौल गमगीन रहा। सचिन की शहादत को सलाम करने लोगों की भारी भीड़ जुटी। सभी ने सचिन को आंखों में आंसू लिए और जुबां पर जब तक सूरज चांद रहेगा सचिन तेरा नाम रहेगा के नारे के साथ अंतिम विदाई दी।

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