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उत्तराखंड में उपचुनाव पर सियासी संकट, बयानों का दौर जारी, टम्टा-कुंजवाल ने किया हमला

tirath singh rawat

हल्द्वानी (योगेश शर्मा) : उत्तराखंड में मुख्यमंत्री के चुनाव को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है, उत्तराखंड में उपचुनाव होगा या नहीं इस पर भी संशय बरकरार है। मुख्यमंत्री की सीट के चुनाव के बहाने कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधा है कि उत्तराखंड में जिस तरह के हालात पैदा हो रहे है वह बीजेपी ने खुद ही तैयार किये है। यदि मुख्यमंत्री समय रहते चुनाव लड़ लेते तो संवैधानिक संकट खड़ा नहीं होता, तो दूसरी तरफ बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार किया है कि कांग्रेस चुनाव में जाने से डर रही है और उसे अंदर ही अंदर अपनी हार का डर सताने लगा है।

सियासी संकट के लिए बीजेपी स्वयं ही जिम्मेदार है-गोविंद सिंह कुंजवाल

उत्तराखंड में उपचुनाव होगा या नहीं यह फैसला तो चुनाव आयोग को लेना है लेकिन मुख्यमंत्री की सीट पर उपचुनाव के बहाने ही सही कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने आ गए हैं, यही नहीं सियासी बयानबाजी का दौर लगातार जारी है, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने दो टूक शब्दों में कहा कि उत्तराखंड में इस समय जिस तरह के हालात पैदा हो रहे हैं वह बीजेपी ने खुद ही तैयार किए हैं, तो दूसरी तरफ पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि राज्य के सियासी संकट के लिए बीजेपी स्वयं ही जिम्मेदार है, क्योंकि यदि मुख्यमंत्री के चुनाव लड़ने की इच्छा होती तो सल्ट विधानसभा उपचुनाव में सीट खाली थी मुख्यमंत्री रहते तीरथ सिंह रावत उस सीट से चुनाव लड़ सकते थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ इसका मतलब बीजेपी चाहती ही नहीं है कि राज्य में उपचुनाव हो.

यदि कांग्रेस में दम है तो वह चुनाव लड़ने के लिए मैदान में आये-भट्ट

भाजपा के प्रदेश महामंत्री सुरेश भट्ट ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि कांग्रेस में दम है तो वह चुनाव लड़ने के लिए मैदान में आये, कांग्रेस चाहती ही नहीं कि उपचुनाव हो क्योंकि सल्ट विधानसभा के उपचुनाव में कांग्रेस को जिस तरीके से हार मिली है उससे कांग्रेस अंदर ही अंदर अपनी हार से डर गई है, लिहाजा मुख्यमंत्री के पास चुनाव लड़ने के लिए सितंबर तक का समय है और चुनाव होगा या नही यह कांग्रेस नहीं बल्कि चुनाव आयोग तय करेगा।

बहरहाल उत्तराखंड में संवैधानिक संकट का क्या समाधान होगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के चुनाव लड़ने पर भाजपा को घेरना शुरू कर दिया है कि भाजपा में अब 2022 के चुनाव को लड़ने की क्षमता नहीं रही। चूंकि भाजपा कांग्रेस पर निशाना साध रही है कि यदि कांग्रेस में हिम्मत है तो वह चुनाव लड़ने से पीछे ना हटे, चाहे वह उपचुनाव हो या 2022 का विधानसभा चुनाव हो।

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