पहाड़ों में बसता है दो बार की बॉक्सर वर्ल्ड चैंपियन का मन, नेशनल गेम्स में साझा की अपनी सफलता

बाॅक्सिंग में दो बार की वर्ल्ड चैंपियन निकहत जरीन ने अपनी स्वर्णिम सफलताओं से जो यश पाया है, उसकी खुशबू देश-दुनिया ने महसूस की है. मौली संवाद काॅन्क्लेव में निकहत जरीन ने बताया कि उनका मन पहाड़ों में बसता है.
पहाड़ों में बसता है दो बार की बॉक्सर वर्ल्ड चैंपियन निकहत जरीन का मन
तेलंगाना के निजामाबाद की रहने वाली दो बार की वर्ल्ड चैंपियन निकहत जरीन ने बुधवार को मौली संवाद काॅन्क्लेव में खुलकर अपनी शुरुआती कठिनाइयों के बारे में बात की. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनका मन कहीं पहाड़ों में बसता है. उत्तराखंड उन्हें बेहद पसंद है. निकहत जरीन राष्ट्रीय खेलों के आयोजन को उत्तराखंड की बड़ी उपलब्धि मानती हैं. निकहत कहती हैं उत्तराखंड ने सफल आयोजन किया है. इससे अन्य छोटे राज्यों को भी प्रेरणा मिलेगी.
निकहत की पंच खाने से लेकर मारने तक की कहानी
निकहत देश की टाॅप महिला मुक्केबाज है. साल 2022 के बर्मिघम के काॅमनवेल्थ खेलों में भी उन्होंने गोल्ड मैडल जीता था. निकहत ने अपने संकल्प से शिखर तक पहुंचने की दास्तान को खुद बयां किया. निकहत ने बताया निजामाबाद जैसे छोटी जगह पर बाॅक्सिंग खेलने वाली वह पहली लड़की थी. पिता खिलाड़ी थे, तो दुनिया की बातों की परवाह नहीं की और मैदान में उतर गई. जहां उन्होंने लड़कों के साथ बाॅक्सिंग की. वो बताती हैं कि शुरू में उन्होंने खूब पंच खाए. लहूलुहान होकर एक दिन घर पहुंची तो मां की चीख निकल गई. मगर बाद में सब को महसूस हो गया कि संघर्ष का ये रास्ता ही शिखर तक ले जाएगा, जिनसे शुरू में मैने पंच खाए, उन्हें बाद में खूब पंच भी मारे.
पढ़ाई में पीछे थी निकहत
स्कूली बच्चों और खिलाड़ियों से संवाद करते हुए निकहत ने बताया कि वो हमेशा पढ़ाई में पीछे रही. मगर खेलों पर केंद्रित थी. उन्होंने स्कूली बच्चों से कहा खेलते हो, तो खूब खेलो, लेकिन पढ़ना भी जरूरी है. अपना उदाहरण देकर उन्होंने कहा यदि मैने ग्रेजुएशन नहीं की होती, तो क्या मैं तेलंगाना पुलिस में डीएसपी हो सकती थी.
पहाड़ की प्रेमी हैं निकहत
निकहत जरीन ने बताया कि वो उत्तराखंड दूसरी बार आई हैं. उन्होंने बताया कि वह कुछ समय पहले मसूरी आई थी, लेकिन खराब मौसम के कारण पूरा लुत्फ नहीं ले सकी थीं. लेकिन वो दून पहली बार आई हैं और पहाड़ की प्रेमी हैं. निकहत बताती हैं कि पेरिस ओलंपिक में मेडल न आने पर जब मायूस हुई, तो जम्मू कश्मीर के पहाड़ों में चली गई थीं. निकहत कहती हैं अब लाॅस एंजिल्स पर मेरी निगाहें हैं, पेरिस की हार को अब वो पीछे छोड़ चुकी है.
निकहत ने स्कूली बच्चों को सिखाए बाॅक्सिंग के गुर
निकहत ने काॅन्क्लेव के दौरान बाॅक्सिंग खेलने वाले बच्चों ने बाॅक्सिंग के गुर भी सीखे. उन्होंने खेलते वक्त अपनी दिक्कतें सामने रखीं, जिसका निकहत ने समाधान दिया. काॅन्क्लेव के दौरान ही उत्तराखंड सरकार के खाद्य सुरक्षा विभाग के उपायुक्त (मुख्यालय) जीसी कंडवाल ने सुरक्षित आहार पर जरूरी बातें सांझा की.