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कौन है Sudha Murty जिनका राज्यसभा के लिए हुआ चयन, जानें यहां

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंफोसिस नारायणमूर्ति की पत्नी और सामाजिक कार्यो के लिए प्रसिद्ध सुधा मूर्ति को राष्ट्रपति की ओर से राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है। पीएम मोदी ने ट्रवीट कर इसकी जानकारी दी। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, मुझे खुशी है कि भारत के राष्ट्रपति ने सुधा मूर्ति को राज्यसभा के लिए नामित किया है। सामाजिक कार्य, परोपकार और शिक्षा सहति विविध क्षेत्रों में सुधा जी का योगदान असीम और प्रेरणादायक रहा। राज्यसभा में उनकी उपस्थिति हमारी नारी शक्ति का एक शक्तिशाली प्रमाण है, जो हमारे राष्ट्र की नियति को आकार देने में महिलाओं की ताकत और क्षमता का उदाहरण है। उनके फलदायी संसदीय कार्यकाल की कामना करता हूं।

Sudha Murty कौन है?

Sudha Murty प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिका हैं। सुधा मूर्ति ने आठ उपन्यास लिखे हैं। वह भारत की सबसे बड़ी ऑटो निर्माता इंजीनियरिंग और लोकोमोटिव कंपनी टेल्को में काम करने वाली पहली महिला इंजीनियर भी हैं।

सुधा मूर्ति के दामाद हैं ब्रिटेन के पीएम

सुधा मूर्ति इंफोसिस फाउंडेशन के संस्थापक नारायण मूर्ति की पत्नी हैं। सुधा मूर्ति के दो बच्चे हैं, बेटी अक्षता मूर्ति और बेटा रोहन मूर्ति। अक्षता नारायण मूर्ति ब्रिटेन में रहने वाली भारतीय फैशन डिजाइनर हैं और यूके के पीएम की पत्नी हैं। ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक सुधा मूर्ति के दामाद हैं। रोहन मूर्ति, मूर्ति क्लासिकल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया के साथ ही एक डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन स्टार्ट अप सोरोको के संस्थापक हैं।

British PM Rishi Sunak

सुधा मूर्ति का जन्म

सुधा मूर्ति का जन्म उत्तरी कर्नाटक में शिगांव में 19 अगस्त 190 को हुआ था। सुधा के पिता का नाम आर.एक.कुलकर्णी और माता विमला कुलकर्णी है। उन्होनें बीवीबी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, हुबली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया। सुधा  इंजीनियरिंग कॉलेज में 150 स्टूडेंट्स के बीच दाखिला पाने वाली पहली महिला थीं। जब वह क्लास में प्रथम आईं तो कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने उन्हें पदक से सम्मानित किया। बाद में इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस से कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स की डिग्री ग्रहण की।

सुधा मूर्ति का करियर

भारत की सबसे बड़ी ऑटो निर्माता कंपनी टेल्को में काम करने वाली पहली महिला  इंजीनियर सुधा मूर्ति बनीं। पुणे में विकास अभियंता के रूप में काम करने के बाद उन्होंने मुंबई और जमशेदपुर में भी काम किया। पति ने जब इंफोसिस फाउंडेशन की स्थापना की तो सुधा मूर्ति ने उन्हें 10000 रुपये उधार दिए और अपनी नौकरी छोड़कर कंपनी शुरू करने में पति नारायण मूर्ति की मदद की।

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