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Chhath Puja kharna: क्या होता है छठ में मनाया जाने वाले खरना? कैसे करते है पूजा? जानें यहां

छठ महापर्व के दूसरे दिन खरना होता है, खरना के दिन छठी मैया की पूजा की जाती है। इस दिन व्रती संतान सुख, समृद्धि और सुख-शांति की प्राप्ति के लिए पूरे दिन उपवासी रहते हुए शाम को पूजा स्थल पर दीप जलाते हैं। फिर व्रती श्रद्धा भाव से सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा करते हैं। शाम से व्रती और उनके परिवारजन मिलकर उन सभी प्रसादों का भोग भगवान को अर्पित करते हैं। फिर यह प्रसाद परिवार के सभी सदस्य एक साथ खाते हैं। खरना छठ पूजा का महत्तवपूर्ण हिस्सा है। यह दिन आस्ता, भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। आइये जानते हैं इसे कैसे मनाया जाता है।

कार्तिक माह की पंचमी तिथि का दिन खरना

छठ पूजा के दूसरे दिन कल यानी 6 नवंबर को खरना किया जाएगा। कार्तिक माह की पंचमी तिथि का दिन खरना कहलाता है। खरना के दिन व्रती महिलाएं शाम को गुड़ की बखीर को प्रसाद के रुप में ग्रहण कर व्रत शुरु करती हैं। जिसके बाद 36 घंटे तक अन्न जल ग्रहण नहीं करती हैं।

कैसे मनाते है Chhath Puja kharna?

बता दें कि छठ पूजा के दूसरे दिन खरना में छठी मैया को प्रसाद का भोग लगाने के बाद, सूर्योदय और सूर्यास्त तक चलने वाले निर्जला व्रत की शुरुआत होती है। फिर व्रती 36 घंटे का कठोर निर्जला व्रत रखते हैं। खरना के दिन बखीर, ठेकुआ, गेंहू का पेठा, घी वाली रोटी आदि विशेष प्रसाद बनाए जाते हैं। प्रसाद को शुद्धता से बनाना बहुत जरुरी होता है। शाम को पूजा के बाद लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं।

खरना का महत्व

खरना छठ पूजा का दूसरा दिन है और इसका धार्मिक और सांस्कृतिक रुप से बहुत महत्व है। खरना के दिन छठी मैया की उपासना की जाती है। यह व्रत शारीरिक और मानसिक शुद्धि के लिए किया जाता है। खरना के दिन बनाए गए प्रसाद जैसे खीर, ठेकुऐ आदि का विशेष महत्व होता है। इन प्रसादों को देवताओं को अर्पित करने के बाद ही ग्रहण किया जाता है। खरना का व्रत ईश्वर के प्रति समर्पण और भक्ति का प्रतीक है।

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