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शानदार है नैनीताल के मेट्रोपोल होटल का इतिहास, क्या है जिन्ना से कनेक्शन, कैसे बना शत्रु संपत्ति ?

नैनीताल में मेट्रोपोल होटल के कुछ हिस्से में हुए अवैध अतिक्रमण को आज धवस्त कर दिया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका इतिहास इसकी बिल्डिंग के जितना ही बड़ा और शानदार है।

मेट्रोपोल होटल से हटाया गया अवैध अतिक्रमण

नैनीताल में मेट्रोपोल होटल से आज अवैध अतिक्रमण को हटा दिया गया है। इसे हटाने की कार्रवाई सुबह से ही शुरू हो गई थी। जिसके लिए 10 बुलडोजर एक साथ गरजे। बता दें कि मेट्रोपोल होटल परिसर में 134 परिवारों ने अवैध रुप से कब्जा किया हुआ था। जिसे हटाने के लिए प्रशासन अतिक्रमणकारियों को पहले ही नोटिस दे चुका था। जिसके बाद आज ये कार्रवाई की गई है।

भारत के सबसे मशहूर होटलों में से है एक मेट्रोपोल

नैनीताल में बढ़ते ट्रैफिक जाम की समस्या को दूर करने के लिए प्रशासन ने ये कदम उठाया। पर क्या आप जानते हैं की शत्रु संपत्ति कहलाया जाने वाला ये होटल किसी जमाने में भारत के सबसे मशहूर होटलों में से एक था। नैनीताल का ये होटल दिखने में जितना भव्य है उतना ही भव्य और गौरवशाली इसका इतिहास भी है।

आज खंडर बन चुका ये होटल किसी जमाने में पर्यटकों से भरा रहता था। सुनसान दिखने वाले इन होटल के गलियारों में कभी खूब चहल पहल हुआ करती थी। तो इस होटल के साथ ऐसा आखिर क्या हुआ की इतना मशहूर होटल गुमनामी के अंधेरे में समा गया।

19वीं सदी में बना था मेट्रोपोल होटल

19वीं सदी के आखिर में बना ये मेट्रोपोल होटल एक जमाने में बड़-बड़े नेता, नामी फिल्मी कलाकारों और धनाढ्य वर्ग के लोगों के बीच काफी पॉपुलर था। शायद यही वजह थी की पाकिस्तान के जनक मुहम्मद अली जिन्ना और उनकी नई दुल्हन रतनबाई ने इस जगह को अपने हनीमून के लिए चुना था।

खंड़हर हो चुके इस मेट्रोपोल होटल को देखकर विश्वास नहीं होता की इस होटल में 75 कमरे, 16 काँटेज और 24 सरवेंट कार्टर के साथ पांच टेनिस लॉन एक समय में खचाखच भरे रहते थे।

कैसे खंडहर में तबदील हो गया ये आलीशान होटल

मेट्रोपोल होटल के खंडहर में तब्दील हो जाने की वजह भारत पाक विभाजन है। ये वो दौर था जब भारत आजाद हो चुका था। तब नैनीताल मेट्रोपोल होटल पे मालिकाना हक रखने वाले महमूदाबाद रियासत के नवाब ने इस मेट्रोपोल होटल को चलाने के लिए एक पारसी जोड़े को दे दिया और खुद ईरान जाकर बस गए।

1957 में जब भारत पाक विभाजित हो गया था तो नवाब साहब ने पाकिस्तान की नागरिकता ले ली। 1968 में भारत में शत्रु संपत्ति अधिनियम लागू हुआ। जिसके तहत ये होटल शत्रु संपत्ति डिकलेयर कर दिया गया और ये भारत सरकार की निगरानी में चला गया।

क्या होती है शत्रु संपत्ति ?

भारत पाक और भारत चीन युद्ध के बाद भारत में रहने वाले जो नागरिक चीन या पाक में जाकर बस गए और उन्होंने वहां की नागरिकता ले ली तो उनकी भारत में मौजूद संपत्ति को भारत सरकार ने शत्रु संपत्ति घोषित कर अपने स्वामित्व में ले लिया। केंद्र सरकार के मुताबिक, देशभर में 12 हजार 611 संपत्तियां ऐसी हैं जिन्हें शत्रु संपत्ति घोषित किया गया है।

होटल की छत का डिजाइन है खास

इस होटल की छत का डिजाइन इतना खास और आकर्षक था की बहुत कम समय में ही ये फेमस हो गया। मेट्रोपोल होटल के छत की ये शैली पूरे देश में नैनीताल पैटर्न रुफ के नाम से मशहूर हो गई। डपिंग और पार्किंग जोन से लेकर आज जमिंदोज होने तक के सफर में इस मेट्रोपोल होटल ने अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए काफी लड़ाइयां लड़ी।

नवाब साहब के परिजनों के लाख कोशिश करने के बाद भी ये संपत्ति उनको नहीं मिल पाई। जब से ये संपत्ति शत्रु संपत्ति घोषित हुई तब से यहां लोगों ने धीरे-धीरे कब्जा करना शुरु कर दिया था। आज जाम की समस्या के चलते इस मेट्रोपोल होटल को ध्वस्त कर दिया गया।

Yogita Bisht

योगिता बिष्ट उत्तराखंड की युवा पत्रकार हैं और राजनीतिक और सामाजिक हलचलों पर पैनी नजर रखती हैंं। योगिता को डिजिटल मीडिया में कंटेंट क्रिएशन का खासा अनुभव है।
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