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बरसाती मौसम में बढ़ रहा Viral Fever का खतरा!, ना करें लापरवाही, जानें कैसे करें बचाव?

Viral Fever Symptoms Causes and Prevention: मौसम बदलने के साथ-साथ लोगों की सेहत पर भी असर पड़ता है। बरसाती मौसम अपने साथ कई बीमारियां साथ लेकर आता है। लोगों को बरसात के समय काफी मुश्किलें झेलनी पड़ती है।

इन दिनों जिसकी सबसे ज्यादा शिकायत होती है, वो है वायरल बुखार(Viral Fever)। हल्का-सा जुकाम या गले में खराश से शुरू हुआ ये आम लक्षण कई बार लबें समय तक आपको परेशानी दे सकता है। जिसमें बुखार भी शामिल है।

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वायरल फीवर के लक्षण कैसे पहचानें? Viral Fever Symptoms

कई बार शुरुआत साधारण सर्दी-जुकाम जैसी लगती है। लगातार छींक आना, खांसी, नाक बहना, शरीर में हल्का दर्द और थकान। लेकिन असली परेशानी तब होती है जब तापमान 101–102 डिग्री तक बना रहता है। दवा लेने के बाद भी बुखार उतरता नहीं। यही संकेत है कि मामला सामान्य नहीं बल्कि वायरल हो सकता है।

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कैसे फैलता है वायरल? Viral Fever Causes

डॉक्टरों के मुताबिक जब संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उसके मुंह से निकले कणों में मौजूद वायरस आसानी से दूसरों तक पहुंच जाते हैं। भीड़भाड़ वाली जगहों, ऑफिस या घर में किसी बीमार व्यक्ति के पास ज्यादा देर रहने पर संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

बचाव कैसे करें? Viral Fever Prevention

  1. शरीर की इम्युनिटी मजबूत रखने के लिए पौष्टिक आहार लें।
  2. मौसमी फल-सब्जियां खाए।
  3. पर्याप्त पानी पीना न भूलें।
  4. बार-बार हाथ धोएं।
  5. साफ-सफाई का खास ध्यान रखें।
  6. ठंडा या बासी खाना खाने से बचें।
  7. हल्का, घर का बना गर्म खाना जैसे सूप या खिचड़ी खाएं।
  8. मच्छरों और गंदगी से दूरी बनाए रखें।

इस बात का भी रखें ध्यान

याद रहे अगर बुखार दो-तीन दिन से ज्यादा टिके, या दवा लेने के बाद भी आराम न मिले तो खुद इलाज करने की बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सही समय पर जांच और इलाज होने से वायरल फीवर जल्दी काबू में आ जाता है और लंबे समय की परेशानी से बचा जा सकता है।

Uma Kothari

उत्तराखंड की डिजिटल मीडिया से जुड़ी युवा पत्रकार उमा कोठारी इस समय खबर उत्तराखंड.कॉम के साथ काम कर रही हैं। उमा अलग-अलग बीट पर खबरें लिखती हैं, जिनमें देश-दुनिया की राजनीतिक गतिविधियों की अहम खबरें, मनोरंजन, खेल और ट्रेंड से जुड़ी अपडेट शामिल हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करते हुए वे ट्रेंड और तथ्य दोनों का संतुलन बनाए रखती हैं, ताकि पाठकों तक सही और ज़रूरी जानकारी पहुंचे।
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