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उत्तराखंड : Corona के नए स्ट्रेन का खतरा, नई गाइडलाइन जारी, जानें क्या हैं नये नियम

aiims rishikesh

 

देहरादून: कोरोना का नया स्ट्रेन सामने आने के बाद दुनियाभर में उसको लेकर चिंता है। भारत में केंद्र सरकार पहले ही गाइडलान जारी कर चुकी है। अब उत्तराखंड सरकार ने भी नई गाइडलाइन जारी कर दी है। इसको 31 जनवरी तक के लिए बढ़ाया गया है। मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने नई एसओपी जारी कर दी है। सरकार की ओर से कोरोना के नए स्ट्रेन को देखते हुए सतर्क और सावधान रहने के लिए भी कहा है।

साथ ही सर्दी और नए साल के जश्न को देखते हुए वायरस के फैलाव के प्रति आगाह किया गया है। कोरोना वैक्सीन की तैयारी पर विशेष जोर दिया गया है। जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को वैक्सीन को लेकर पूरी तैयारी करने का आदेश दिया गया है। स्थानीय परिस्थिति के अनुसार, संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जिला प्रशासन अपनी ओर से सख्त निर्णय ले सकते हैं। इसमें साप्ताहिक बंदी और नाइट कर्फ्यू जैसे कड़े फैसले भी शामिल हैं। कंटेनमेंट जोन घोषित करने और इन जोनों में पूर्ण तालाबंदी का अधिकार भी जिला प्रशासन के पास है।

एसओपी की महत्वपूर्ण बातें:

  • 31 जनवरी तक के लिए प्रदेश में समारोह आदि के आयोजन में पूर्व में जारी 100 लोगों की शर्त लागू रहेगी।
  • 29 नवंबर को जारी पूर्व की एसओपी की शर्तें जस की तस लागू रहेंगी।
  • कोरोना के नए स्ट्रेन के मद्देनजर सतर्कता बरतने और निगरानी रखने की कोशिश में कहीं से कोई कमी नहीं होगी।
  • नए साल के जश्न और सर्दियों को देखते हुए कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकने में सतत निगरानी में कहीं कोई कमी नहीं की जाएगी।
  • केंद्र सरकार के स्तर पर वैक्सीन को जारी करने की तैयारी का संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों से संपर्क कर कोरोना वैक्सीनेशन के पहले चरण में चिह्निकरण, डाटा बेस बनाने, वैक्सीन की डिलीवरी, भंडारण, सुरक्षा, परिवहन और वैक्सीन के लाभार्थियों के बारे में दिशा-निर्देश जारी कर सकता है।
  • एसओपी में 18 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट से जारी आदेश का भी संज्ञान लिया गया है। संबंधित पक्षों से कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन करने और दिशा-निर्देश एसओपी आदि का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की स्वतंत्रता दी है।
  • अंतरराज्यीय और राज्यों के अंदर परिवहन में किसी भी तरह की रोक टोक नहीं होगी।

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