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पर्यटकों की भीड़ Bugyal को रौंद रही!, तुंगनाथ के मुख्य पुजारी की वीडियो ने छेड़ी बहस

हमारे उत्तराखंड के धार्मिक स्थल किस तरह से पर्यटन स्थल में तबदील होते जा रहे हैं, ये तो आप सभी को पता है।
हालांकि इसी बीच चंद्रशिला से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जो शायद इन पवित्र स्थलों को महज़ टूरिस्ट स्पॉट बनने से रोकने की पहली आवाज़ है।

दरअसल वायरल वीडियो में एक बुजुर्ग नजर आ रहे हैं। इनकी कई वीडियो सोशल मीडिया पर सुर्खियां बंटोर रही हैं।
हालांकि इस नए वीडियो में स्थानीय बुजुर्ग पर्यटकों को चंद्रशिला का महत्व बताते नजर आ रहे हैं। साथ ही अपना दर्द भी बंया कर रहे हैं।

तुंगनाथ से पुजारी जी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

वीडियो में बुजुर्ग का साफ कहना है कि चंद्रशिला कोई टूरिस्ट स्पॉट नहीं है। जहां आकर पिकनिक मनाई जाए या हुड़दंग किया जाए। पूजारी जी आगे कहते हैं कि चंद्रशिला पितरों का स्थान है यानी बेहद पवित्र जगह है। वायरल वीडियो में बुजुर्ग बता रहे हैं कि वो चंद्रशिला खुद नंगे पैर पूजा अर्चना करने आते हैं। तो सोचिए जिस जगह पर स्थानीय लोग ही खुद नंगे पांव जाते हैं वो जगह कितनी संवेदनशील होगी पर अब वहां टूरिस्ट जूतों के साथ रील्स बनाने और पार्टी करने पहुंच रहे हैं।

बुगयालों को बर्बाद कर रहे पर्यटक

वैसे ये कोई पहला मामला नहीं है। ना ही ये कोई पहली जगह है, जहां पर टूरिस्ट बिना प्रकृति के नियमों को समझे बिना तिर्थस्थलों की गरिमा को जाने सोशल मीडिया में व्यूज बटोरने के चक्कर में पहुंच जाते हैं। पहाड़ों की ऐसी संवेदनशील जगहों से ऐसी कई वीडीयोज वायरल होते हैं। जिसमें लोग बाइक लेकर बुगयालों में जा रहे हैं। कहीं बुग्यालों में बैठकर खाना बना रहे हैं। ऐसे ऊंचाई वाले इलाकों में कचरा फैलाकर आते हैं।

बुग्याल नाज़ुक और संवेदनशील!

अब इसमें सारी गलती पर्यटकों की भी नहीं है। दरअसल उन्हें कभी बताया ही नहीं गया कि उत्तराखंड के ये बुग्याल कितने नाज़ुक और संवेदनशील हैं। यहां की प्रकृति के साथ कैसा बर्ताव करना चाहिए। यहां के धार्मिक स्थलों का क्या महत्व है। किस स्थल पर कब और किन नियमों के साथ जाना चाहिए।

प्रशासन समझाए पर्यटकों को जगह का महत्व!

हम पर्यटकों से सीधे उम्मीद तो कर लेते हैं कि वो खुद ही सब कुछ सीखे समझे होंगे लेकिन हकीकत में ऐसा होता नहीं है। जिस तरह से तुंगनाथ में ये बुजुर्ग चंद्रशिला के बारे में यात्रियों को बता रहे हैं। यहां की प्रकृति के बारे में उन्हें समझा रहे हैं। कहीं ना कहीं उत्तराखंड की हर संवेदनशील जगह पर टूरिस्ट को ऐसे ही समझाने सिखाने की जरूरत है।

पहाड़ और पहाड़ के नियम कायदे कानून टूरिस्टों को बताने की जरूरत है। ये साशन प्रशासन की जिम्मेदारी होनी चाहिए। अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हमारी इस प्रकृति और पवित्र स्थलों की गरिमा को बचाए रखना आने वाला वक्त में सबसे बड़ी चुनौती बन जाएगा।

Uma Kothari

उत्तराखंड की डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय उमा कोठारी खबर उत्तराखंड (khabaruttarakhand.com) में बतौर पत्रकार कार्यरत हैं। वे राजनीति, मनोरंजन, खेल और ट्रेंडिंग विषयों पर गहन और तथ्यपरक खबरें लिखती हैं। उत्तराखंड के स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों पर इनकी पकड़ मजबूत है। डिजिटल मीडिया में इनका अनुभव पाठकों को सटीक, संतुलित और समय पर जानकारी देने में सहायक है। उत्तराखंड | खबर उत्तराखंड
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