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हरदा की पोस्ट से मंशा साफ, कहा-हां मैं जानता हूं 2002 में लोगों ने मेरे चेहरे पर वोट दिया

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देहरादून : उत्तराखंड कांग्रेस में विधानसभा चुनाव से पहले गुटबाजी खुलकर सामने आई वो भी सीएम चेहरा घोषित करने को लेकर। कांग्रेस नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत हाईकमान से विधानसभा चुनाव में सीएम पद का चेहरा घोषित करने की मांग की थी। उन्होंने यह मांग सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर की थी। इसके बाद उनके समर्थन और विरोध में कांग्रेस के दो धड़े आमने-सामने खड़े हो गए थे। राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा, पूर्व स्पीकर गोविंद सिंह सिंह कुंजवाल, धारचुला के विधायक हरीश धामी ने उनका खुलकर समर्थन किया। हालांकि, पार्टी में उनके विरोधी कह रहे हैं कि हरीश रावत फिर से मुखमंत्री बनने के लिए यह बयान दे रहे हैं। यह उनकी दबाव की राजनीति का दांव है। लेकिन हरीश रावत ने इससे इंकार किया लेकिन एक बार फिर से हरीश रावत की पोस्ट से साबित हो गया है कि वो क्या कहना चाहते हैं।

मुझसे बहुधा लोग सवाल करते हैं कि हमारी आशाओं का उत्तराखंड नहीं बना-हरीश रावत

जी हां हरीश रावत ने लिखा कि आज काशीपुर में, फिर खटीमा में लोगों ने मुझसे कहा कि आपने हमको जिला नहीं दिया, बड़ी उम्मीदें थी। मैं, उनको कैसे समझाता कि मैं 9 नये जिले खोलने की पूरी तैयारी कर चुका था, 100 करोड़ रुपये का बजट का प्राविधान भी किया था, लेकिन ज्यों ही 1 जिले को खोलने का प्रस्ताव आया तो सरकार डगमगाने लग गई। उत्तराखंड में मुझसे बहुधा लोग सवाल करते हैं कि हमारी आशाओं का उत्तराखंड नहीं बना, लोग मुझसे और भी कुछ बड़े प्रश्नों पर कहते हैं कि आपने क्यों नहीं कर दिया? मैं, कैसे उनसे विनती करूं कि मुझे तो बागडोर ही ऐसे समय में मिली, जब आपदा से ग्रस्त राज्य था और केंद्र में हमारी न सुनने वाली सरकार आ चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद भी मैंने सभी चुनौतियों को छूने की कोशिश की।

हाँ 2002 में मैं जानता हूंँ कि लोगों ने मेरे चेहरे पर वोट दिया-हरीश रावत

आगे हरीश रावत ने लिखा कि हाँ 2002 में मैं जानता हूंँ कि लोगों ने मेरे चेहरे पर वोट दिया, मैं जानता हूंँ वर्ष 2002 में लोगों ने यह मानकर के वोट किया कि हरीश रावत मुख्यमंत्री होगा, वर्ष 2012 में भी कुछ ऐसी ही स्थिति थी मगर बागडोर मेरे हाथ में नहीं आयी, मेरे हाथ में तो केवल अपेक्षाएं आयी, अब मैं एक ऐसे पड़ाव पर हूंँ कि जिनमें अपेक्षाओं के बोझ के साथ निवृत होना बहुत कठिन हो जायेगा! लोगों को हमारे जैसे राज्य में यह मालूम होना चाहिये कि जिस व्यक्ति को हम वोट दे रहे हैं उसका एजेंडा क्या है? ताकि पार्टी और लोग भी अपनी सोच को उसी के अनुसार ढाल सकें। इसलिये मैं, मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने पर जोर दे रहा हूँ।

वहीं हरीश रावत के बयान पर नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने कहा है कि वह खुद को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करवा लें, कांग्रेस को कोई एतराज नहीं होगा।

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