चुनाव के मैदान में प्रत्याशी उतारेंगे तीर्थपुरोहित, भाजपा को देंगे चुनौती, विधानसभा घेराव की चेतावनी

ऋषिकेश : इस बात से हर कोई वाकिफ है कि तीर्थ पुरोहित उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड भंग करने को लेकर मोर्चा संभाले हैं. कई महीने से वो बोर्ड को भंग करने की मांग कर रहे हैं। बीते दिन उन्होंने केदारनाथ में पूर्व सीएम, विधायकों और मंत्रियों का विरोध किया। वहीं अब भाजपा सरकार को चुनौती देने के लिए तीर्थ पुरोहितों ने चुनाव के मैदान में उतरने का और सरकार को चुनौती देने का मन बनाया है।

जी हां इसका ऐलान धाम तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी महापंचायत समिति ने किया है. उन्होंने कहा कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में महापंचायत तीर्थ क्षेत्र की 15 सीटों पर अपना प्रत्याशी उतारेगी। उनका कहना है कि सरकार ने हमारे साथ छल किया है और इसलिए उन्होंने चुनाव में प्रत्याशी उतारने का मन बनाया है। तीर्थ पुरोहितों ने एक बार फिर साफ किया कि उन्हें देवस्थानम बोर्ड भंग करने के अलावा कोई और विकल्प मंजूर नहीं है। तीर्थपुरोहितों ने देश के श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि वे पीएम, राष्ट्रपति और राज्यपाल को पोस्टकार्ड भेजकर बोर्ड भंग करने की मांग करें।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए गुरुवार समिति के अध्यक्ष कृष्णकांत कोटियाल ने कहा कि आंदोलन को पूरे ढाई साल हो गये हैं। आरोप लगाया कि सरकार तीर्थपुरोहितों और हक हकूकधारियों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। कहा कि अब आरपार की लड़ाई होगी। इसकी शुरुआत गैरसैंण में होने वाले शीतकालीन सत्र से की जाएगी। इस दौरान विधानसभा का घेराव किया जाएगा। उन्होंने हाई पावर कमेटी के गठन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महापंचायत आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, उत्तराखंड क्रांति दल व अन्य संगठनों के सहयोग से पंद्रह सीटों पर अपने प्रत्याशी भी उतारेगी।

समिति के कोषाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण जुगडान ने कहा कि उत्तराखंड के चार धामों और देश के अन्य मंदिरों की यात्राओं की परिस्थितियां पूरी तरह से भिन्न हैं। इसलिए यहां के धामों की तुलना किसी अन्य मंदिर से करना उचित नहीं है। यदि सरकार धामों का विकास ही करना चाहती है तो बदरीनाथ-केदार नाथ मंदिर समिति के माध्यम से कर सकती है। महामंत्री हरीश डिमरी ने आरोप लगाया कि केदारनाथ में सरकार ने विकास के नाम पर सिर्फ पुरोहितों की जमीन तो ले ली, लेकिन आज तक न तो उन्हें मकान दिए गए और ना रजिस्ट्री।

 

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