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जब ‘ड्रामा क्वीन’ Rakhi Sawant ने लड़ा था चुनाव, इतने मिले थे वोट, ये था पार्टी का चिन्ह

बॉलीवुड इंडस्ट्री की ‘ड्रामा क्वीन’ राखी सावंत (Rakhi Sawant)आए दिन किसी न किसी चीज को लेकर सुर्खियों में बनी रहती है। हर कोई उन्हें जानता है।आइटम नंबर से राखी ने लोगों के बीच जगह बनाई। एक्टिंग से ज्यादा लोग राखी को एंटरटेनमेंट और ड्रामा क्वीन के नाम से जानते है। अपने अजीबोगरीब अंदाज के चलते वो सोशल मीडिया पर छायी रहती है। लेकिन एक वक्त ऐसा था जब उन्होंने एक्टिंग के अलावा राजनीति में आने की सोची। जी हां, राखी ने लोकसभा चुनाव लड़ा था।

जब Rakhi Sawant ने लड़ा था चुनाव

राखी सावंत कुछ ना कुछ ऐसा करती रहती है जिसके चलते वो चर्चाओं का विषय बनी रहती है। ऐसे में आज हम आपको उस समय के बारे में बताने जा रहे है जब राखी ने चुनाव लड़ने का सोचा। राखी ने मुंबई उत्तर-पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ा। जिसमें उन्हें केवल 15 वोट मिले। चुनाव हारने के साथ राखी की जमानत भी जब्त हो गई थी।

ये था चुनाव चिन्ह

साल 2014 में राखी ने लोकसभा चुनाव लड़ा। बता दें की उस दौरान राखी बीजेपी से टिकट पाना चाहती थी। लकिन पार्टी ने उन्हें एहमियत तक नही दी। जिसके बाद उन्होंने खुद की राष्ट्रीय आम पार्टी बनाई। इस पार्टी का चुनाव चिन्ह था हरी मिर्च।

rakhi sawant elections-mirchi symbol

वो कांग्रेस के गुरुदास कामत के खिलाफ मुंबई उत्तर-पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र से खड़ी हुई। ऐसे में उन्हें केवल 15 वोट मिले थे। जिसके बाद राखी ने राष्ट्रीय आम पार्टी से इस्तीफा दिया और रामदास आठवले की पार्टी (RPI) में गई। जहां उन्होंने दलितों के लिए काम करने की बात कही थी।

Rakhi Sawant ने फिल्मों में किया है काम

बता दें की राखी सावंत ने टेलीविजन के साथ-साथ बॉलीवुड, मराठी, तेलुगु, तमिल आदि फिल्मों में भी काम किया है। रियलिटी टीवी शो ‘बिग बॉस’ में साल 2006 में राखी को बुलाया गया था। इसके साथ ही वो कई और सीजन में भी शो का हिस्सा बन चुकी है। जहां उन्होंने दर्शको को काफी एंटरटेन किया।

Uma Kothari

उत्तराखंड की डिजिटल मीडिया से जुड़ी युवा पत्रकार उमा कोठारी इस समय खबर उत्तराखंड.कॉम के साथ काम कर रही हैं। उमा अलग-अलग बीट पर खबरें लिखती हैं, जिनमें देश-दुनिया की राजनीतिक गतिविधियों की अहम खबरें, मनोरंजन, खेल और ट्रेंड से जुड़ी अपडेट शामिल हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करते हुए वे ट्रेंड और तथ्य दोनों का संतुलन बनाए रखती हैं, ताकि पाठकों तक सही और ज़रूरी जानकारी पहुंचे।
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