
कोटद्वार: मुख्यमंत्री ने दो दिन पहले ही कोटद्वार में कोटद्वार का नाम बदलकर कण्व नगरी कोटद्वार रखने का एलान किया था, लेकिन इस पर अब सियासत शुरू हो गई है। कुछ लोगों का कहना है कि कोटद्वार को नाम नहीं बदला जाना चाहिए। जबकि कुछ लोगों को मानना है कि नाम बदला जाना चाहिए। यही स्थिति नाम को लेकर है कि अगर बदल भी देते हैं, तो फिर नाम क्या होगा। कण्व नगर कोटद्वार या कुछ और ?
इस बहस को पूर्व सीएम हरीश रावत ने नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने कहा कि जिस सम्राट के नाम पर देश का नाम पड़ा है। उसीके नाम पर कोटद्वार को नाम भी होना चाहिए। उन्होंने सरकार को भरतनगर नाम भी सुझाया है। हालांकि ये सरकार को पसंद आता है या नहीं। जबकि कोटद्वार को पहले से ही कण्व नगरी कहा जाता रहा है।
कण्व नगरी के पीछे कण्व ऋषि की तपस्या को आधार बनाया गया है। जबकि पूर्व सीएम हरीश रावत का कहना है कि जिस महान सम्राट के नाम पर देश का नाम है और जिनका क्रीड़ा स्थल कोटद्वार रहा हो, उन्हीें के नाम पर कोटद्वार को नाम होना चाहिए। अब गेंद सरकार के पाले में है कि सरकार क्या नाम रखती है।