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अब हरियाणा में सड़क पर शव रखकर नहीं कर सकते प्रदर्शन, सरकार ला रही नया कानून

जल्द ही हरियाणा की सरकार नया कानून लाने वाली है। जिसके बाद सड़क या हाइवे पर शव को रखकर प्रदर्शन नहीं किया जा सकेगा। ऐसे में अगर मृत रिश्तेदारों के तहत शव का इस्तेमाल करने का दोषी पाया जाता है तो जिला प्रशासन पुलिस के सहयोग से शव को कब्जे में लेगा और अंतिम संस्कार करेगा।

इसी के साथ अगर पुलिस मृतक के परिवार को विरोध प्रदर्शन के लिए शव का उपयोग करते हुए पाती है, तो परिवार के दोनों सदस्यों और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को कम से कम छह महीने की कैद की सजा होगा, जिसे पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है। साथ ही 5000 रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। ऐसे सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे।

विधेयक के ड्राफ्ट को राज्य मंत्रिमंडल से मंजूरी

ये प्रावधान प्रस्तावित हरियाणा शव सम्मान विधेयक 2023 का हिस्सा हैं, जिसे 20 फरवरी से शुरु होने वाले हरियाणा विधानसभा के आगामी बजट सत्र में चर्चा के लिए निर्धारित किया गया है। विधेयक के ड्राफ्ट को राज्य मंत्रिमंडल से मंजूरी मिल गई है।

बिल के ड्राफ्ट के अनुसार, सेक्शन में कहा गया है कि परिवार के सदस्यों को शव क इस्तेमाल प्रदर्शन करने के लिए नहीं करना चाहिए या किसी अन्य व्यक्ति को इसके लिए सहमति नहीं देनी चाहिए। शव रखकर प्रदर्शन करने पर प्रदर्शनकारियों से शव कब्जे में लेकर परिजनों की उपस्थिति में प्रशासन अंतिम संस्कार करवाएगा। हालांकि ,परिजनों को पहले प्रशासन की तरफ से मनाया जाएगा।

सेक्शन 7 और 8 में शव को जब्त करने और अंतिम संस्कार करने के लिए पुलिस और कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियों का वर्णन किया गया है। सेक्शन 7 बताता है कि पुलिस को शव को अपने कब्जे में लेना चाहिए और तुरंत कार्यकारी मजिस्ट्रेट और जिला पुलिस अधीक्षक को सूचित करना चाहिए।

पुलिस और सरकार कर देगी अंतिम संस्कार

विधेयक इस बात पर जोर देता है कि अगर परिवार के सदस्य नोटिस मिलने के बाद भी ऐसा करते हैं, तो सार्वजनिक प्राधिकरण अंतिम संस्कार करेगा। विधेयक में हिरासत में मौत के मामलों में पोस्टमार्टम परीक्षाओं की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी को अनिवार्य बनाया गया है। साथ ही लावारिस शवों के आनुवांशिक डेटा और जैविक नमूनों के लिए एक डेटा बैंक की स्थापना का भी जिक्र है।

सजा का प्रावधान

सेक्सन 16 से 21 में विभिन्न अपराधों के लिए दंड का जिक्र है, जिसमें विरोध प्रदर्शन के लिए शवों को इस्तेमाल करने पर परिवार के सदस्यों और व्यक्तियों के लिए जेल और जुर्माने का प्रावधान है। अधिनियम के तहत सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती घोषित किए गए हैं। इस अधिनियम का उद्देश्य प्रत्येक मृत व्यक्ति के समुदाय या धार्मिक परंपराओं के अनुसार समय पर और सम्मानजनक अंतिम संस्कार के अधिकार पर जोर देना है। शव सम्मान विधेयक में प्रावधान लाया जा रहा है कि अगर शव रखकर कोई प्रदर्शन करता है तो सभी लोगों पर मुकदमा चलाया जाएगा। साथ ही दोष सिद्ध होने पर एक साल की कैद और 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

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