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नंदा देवी राजजात यात्रा 2026 से पहले विवाद, कुरूड़ मंदिर समिति का आरोप, कहा मां नंदा के बिना राजजात कैसे?

चमोली में 12 वर्षों के अंतराल पर आयोजित होने वाली विश्व प्रसिद्ध नंदा देवी राजजात यात्रा 2026 की तैयारियां जहां जिला प्रशासन ने शुरू कर दी हैं, वहीं यात्रा को लेकर अब विरोधाभास भी सामने आने लगे हैं। यात्रा के स्वरूप और परंपराओं को लेकर दो क्षेत्रों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।

दो क्षेत्रों के बीच खुलकर सामने आए मतभेद

इसी मुद्दे को लेकर रविवार को प्रेस क्लब में मां नंदा देवी सिद्धपीठ कुरूड़ मंदिर, विकास खंड नंदानगर, जनपद चमोली से जुड़ी बड़ी नंदाजात 2026 आयोजन समिति ने प्रेसवार्ता की। इस दौरान समिति ने नंदा देवी राजजात समिति नोटी को कटघरे में खड़ा करते हुए गंभीर आरोप लगाए।

मां नंदा देवी के बिना कैसे हो सकती है राजजात

मां नंदा देवी के पूजारी प्रकाश गौड़ ने कहा कि वे वर्ष 2000 से लगातार इस बात का विरोध करते आ रहे हैं कि मां नंदा देवी के बिना राजजात कैसे हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह सर्वविदित है कि राजा अपनी पूजा देने नंदकेसरी में आते हैं, यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, लेकिन इसके बावजूद शासन-प्रशासन और नोटी से जुड़े लोगों द्वारा परंपराओं की अनदेखी की जा रही है।

समिति के माध्यम से किया जा रहा शासन-प्रशासन को गुमराह

प्रकाश गौड़ ने आरोप लगाया कि नोटी क्षेत्र से भुवन नौटियाल द्वारा एक समिति बनाई गई है, जिसे नंदा देवी राजजात संचालन समिति नाम दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसी समिति के माध्यम से शासन और प्रशासन को गुमराह किया जा रहा है और वास्तविक धार्मिक परंपराओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।

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मां नंदा की आस्था को पहुंच सकती है ठेस: पुजारी

प्रकाश गौड़ ने स्पष्ट कहा कि बिना मां नंदा की विधिवत उपस्थिति और पारंपरिक प्रक्रिया के राजजात यात्रा का आयोजन न केवल धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है, बल्कि इससे आस्था को भी ठेस पहुंचती है। आयोजन समिति ने मांग की कि नंदा देवी राजजात यात्रा 2026 का संचालन शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार ही किया जाए।

Sakshi Chhamalwan

Sakshi Chhamalwan उत्तराखंड में डिजिटल मीडिया से जुड़ीं युवा पत्रकार हैं। साक्षी टीवी मीडिया का भी अनुभव रखती हैं। मौजूदा वक्त में साक्षी खबरउत्तराखंड.कॉम के साथ जुड़ी हैं। साक्षी उत्तराखंड की राजनीतिक हलचल के साथ साथ, देश, दुनिया, और धर्म जैसी बीट पर काम करती हैं।
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