
Nainital Asia First Methodist Church History: क्या आप एशिया के पहले Church के बारे में जानते हैं। एक ऐसा Church जिसका इतिहास आज़ादी की लड़ाई से भी जुड़ा हुआ है। अगर नहीं तो ये आर्टिकल आपके लिए है। आज हम आपको हमारे उत्तराखंड(Nainital) की एक ऐसी ऐतिहासिक धरोहर से रूबरू कराने जा रहे हैं जो ना सिर्फ ईसाई समुदाय की आस्था का केंद्र है बल्कि ये सामाजिक सौहार्द की भी निशानी है। चलिए क्रिसमस इव (Christmas) के मौके पर इसके बारे में जान लेते है।

नैनीताल में है एशिया का चर्च Nainital Asia First Methodist Church History
हम बात कर रहे हैं भारत के पहले Methodist Church की जो हमारे उत्तराखंड के नैनीताल में मौजूद है। ये ऐतिहासिक Methodist Church नैनीताल के मल्लीताल में है। ये Church 160 साल से भी ज्यादा पुराना है और अपने Gothic style के आर्किटेक्चर के लिए काफी मशहूर है। यहीं नहीं 1857 की क्रांति से भी इस Church के तार जुड़े हुए हैं।
1857 के दौर में शुरू हुई इस चर्च की कहानी
इतिहासकार प्रो अजय रावत की मानें तो इस Church के बनने की कहानी शुरु होती है अमेरिकी मिशनरी विलियम बटलर से 1857 के दौर में जब आजादी की लड़ाई चल रही थी तब एक अमेरिकी मिशनरी विलियम बटलर भारत आए थे। विलियम बटलर ने कलकत्ता और इलाहाबाद में Church बनाने की कोशिश की पर वो कहीं कामयाब नहीं हो पाए। इसके बाद विलियम बरेली पहुंचे और वहां Church बनाने के लिए ज़मीन खरीद ली।

आजादी की लड़ाई से जुड़ा है इतिहास
लेकिन तब मेरठ में 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम शुरु हो गया। मेरठ में लगी आजादी की ये आग बरेली पहुंची तो बरेली के कमांडर निकल्सन ने विलियम बटलर को सलाह दी कि आपका यहां रहना सुरक्षित नहीं है। आप नैनीताल चले जाइए। यहीं से इस Church की कहानी भी शुरु हुई। 22 सितंबर 1858 को विलियम बटलर नैनीताल पहुंचे। यही वो मोड़ था जिसने भारत के पहले Methodist Church की नींव रखी।
मल्लीताल में इस Church का शुरू हुआ निर्माण
तब कुमाऊं के कमिश्नर सर हेनरी रैमजे ने बटलर की मदद की। उन्हीं के सहयोग से मल्लीताल में इस Church का निर्माण शुरू हुआ। इस Church को बनने मे लगभग दो साल लगे। इस Church की खासियत ये है कि इसे नैनीताल के मौसम और प्राकृतिक सौंदर्य को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया था। बड़ी‑बड़ी खिड़कियों से यहां प्राकृतिक रोशनी भर जाती है। इसलिए इसे ‘County Church’ भी कहा जाता है।
चर्च नैनीताल की सांस्कृतिक विरासत
आज ये Church सिर्फ ईसाई समुदाय का नहीं, बल्कि नैनीताल की पूरी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। नैनीताल को वैसे भी सभी धर्मों की नगरी कहा जाता है। यहां आपको मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और Church सब एक ही गली में मिलेंगे। यही नैनीताल की गंगा-जमुनी तहजीब का जीता-जागता उदाहरण है। भारत के पहले Methodist Church का ऐतिहासिक सफर जो आज़ादी की लड़ाई से शुरु हुआ था। आज विश्वास और भाईचारे का प्रतीक बन चुका है।