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बंदर की दरियादिली! पैसों से भरा बैग चुराकर करने लगा नोटों की बारिश, वीडियो वायरल

बंदरों के आतंक से हर कोई वाकिफ है। लेकिन बंदर के आतंक की वजह से लोगों को खुशी हो ये आपने नहीं सुना होगा। ऐसा ही एक अजीबो-गरीब मामला उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से आ रहा है। यहां बिधूना तहसील कार्यालय में एक बंदर ने पैसो से भरा बैग चुराया और पेड़ पर चढ़कर नोटों की बारिश करने लगा। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जहां पर लोग नोटों को पकड़ते हुए नजर आ रहे हैं।

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बंदर ने चुराया पैसों से भरा बैग!

दरअसल बंदर ने एक बाइक से नकदी से भरा बैग चुरा लिया और पेड़ पर चढ़ गया। इसके बाद बंदर ने बैग खोलकर उसमें रखे पैसों को नीचे फैंकना शुरू कर दिया। आसमान से बरस रहे नोटों को लूटने के लिए लोगों की भीड़ इक्ट्ठा हो गई। ये पूरा वाक्या कैमरे में कैद हो गया और अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

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फिर करने लगा नोटों की बारिश

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि 500 के नोटों की बारिश हो रही है। वहीं पर मौजूद लोग उसे पकड़ने और उठाने में लगे हुए है। ये अजीबो-गरीब घटना मंगलवार दोपहर की है। दरअसल डोडापुर गांव के एक प्राइवेट टीचर अपने वकील के साथ तहसील कार्यालय आए थे। वहां उन्हें राजिस्ट्रेशन का काम था। बाइक की डिग्गी में उनका एक बैग था जिसमें करीब 80 हजार रुपए थे। जब वो डाक्यूमेंट्स में बिजी थे, तभी बंदर आया और उनका नकदी से भरा बैग उठाकर भाग गया।

सोशल मीडिया पर वीडियो हुआ वायरल

बैग में जब बंदर को खाने के लिए कुछ नहीं मिला। तो उसने बैग में रखे 500 के नोटों को हवा में उछालना शुरू कर दिया। लोग भी मदद करने के बजाय पैसे लूटने में लग गए। ये देखते हुए टीजर ने अपनी नकदी वापस पाने की पूरी कोशिश की।

शख्स को नहीं मिले पूरे पैसे वापस!

लेकिन तब तक कई लोग पैसों को लूट चुके थे। टीचर को सिर्फ 52,000 ही वापस मिले। बाकी 28000 या तो फट गए या फिर लोगों ने लूट लिए। स्थानिय लोगों की माने तो इस इलाके में बंदरों का आतंक है। कई बार बंदर लोगों के बैग, कागज और जरूरू डाक्यूमेंट्स लेकर भाग जाते है।

Uma Kothari

उत्तराखंड की डिजिटल मीडिया से जुड़ी युवा पत्रकार उमा कोठारी इस समय खबर उत्तराखंड.कॉम के साथ काम कर रही हैं। उमा अलग-अलग बीट पर खबरें लिखती हैं, जिनमें देश-दुनिया की राजनीतिक गतिविधियों की अहम खबरें, मनोरंजन, खेल और ट्रेंड से जुड़ी अपडेट शामिल हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करते हुए वे ट्रेंड और तथ्य दोनों का संतुलन बनाए रखती हैं, ताकि पाठकों तक सही और ज़रूरी जानकारी पहुंचे।
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