विवादों में घिरी प्राग फार्म की ज़मीन पर बड़ा अपडेट!, भूमि बनी राज्य सरकार की संपत्ति

लंबे वक्त से विवादों में चल रही किच्छा के प्राग फार्म की जमीन पर अब प्रशासन की संपत्ति बन गई है। शनिवार को एडीएम कौस्तुभ मिश्रा की अगुवाई में ये बड़ी कार्रवाई की गई। हाईकोर्ट से स्पेशल अपील खारिज होने के बाद ये कदम उठाया गया है।
विवादों में घिरी प्राग फार्म की ज़मीन राज्य सरकार की संपत्ति
3 नवंबर 2022 को जिलाधिकारी न्यायालय ने आदेश दिया कि ये भूमि राज्य सरकार में निहित है। हालांकि, केएन अग्रवाल पक्ष ने हाईकोर्ट में स्पेशल अपील दाखिल कर दी। इसके चलते प्रशासन जमीन पर कब्जा नहीं ले सका।
मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा और 13 अगस्त 2024 को अदालत ने स्पेशल अपील खारिज कर दी। यानी अब कानूनी रूप से ये जमीन राज्य सरकार की हो गई। इसके बाद प्रशासन ने शनिवार को जमीन पर कब्जा ले लिया।
दशकों पुराना है किच्छा के प्राग फार्म का विवाद
दरअसल किच्छा के प्राग फार्म का ये विवाद दशकों पुराना है। बता दें की इस विवाद की जड़ें ब्रिटिश काल तक जाती हैं। दरअसल साल 1933 में ब्रिटिश सरकार ने किच्छा तहसील के 12 गांवों की करीब 5193 एकड़ भूमि प्राग नारायण अग्रवाल को 99 साल की लीज पर दी थी।
पांच साल बाद 1938 में प्राग नारायण की मौत हो गई। इसके बाद ये जमीन उनके वारिस केएन अग्रवाल और शिव नारायण अग्रवाल के नाम हो गई। आजादी के बाद इस जमीन का कुछ हिस्सा खासकर महाराजपुर और श्रीपुर गांव की भूमि, विस्थापितों को दे दी गई थी। लेकिन बाकी जमीन का मामला अधर में लटका रहा।
प्रशासन और अग्रवाल परिवार के बीच कानूनी लड़ाई
1966 में सरकार ने गवर्नमेंट एस्टेट ठेकेदारी अबोलेशन एक्ट के तहत ये लीज खत्म कर दी। 20 सितंबर 2014 को एसएन अग्रवाल पक्ष की 1972.75 एकड़ जमीन पर कब्जा हो चुका था। इसके बाद कुल 4034.03 एकड़ जमीन बची जिसे लेकर प्रशासन और अग्रवाल परिवार के बीच कानूनी लड़ाई चली।