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आर्थिक सलाहकार से लेकर प्रधानमंत्री तक का सफर, मौन रहकर निकाले कई हल, जानिए पूर्व पीएम Manmohan Singh के पांच दशक  

भारतीय राजनीति के ऐसे शख्सियत जो बहुत कम बोलते थे मगर जब बोलते थे तो बेहद मजबूती से। हालात कैसे भी विषम हों, कितने भी विकट हो वे मौन रहकर हल निकाल लिया करते थे। ऐसे देश के आर्थिक सुधारों के जनक और 10 साल तक देश की कमान संभालने वाले  पूर्व प्रधानमंत्री Manmohan Singh का गुरुवार 26 दिसंबर 2024 को निधन हो गया है। 26 सिंतबर 1931 को मनमोहन सिंह का पंजाब के चकवाल जिले के गाह में जो अब पाकिस्तान में है वहां जन्म हुआ था। वे कई प्रमुख पदों पर रहे। मनमोहन सिंह की पहचान एक बुद्धिजीवी, आर्थिक सुधारों के प्रणेता और जनसेवा के प्रति उनके समर्पण के लिए जाना जाता है। 1991 में जब देश आर्थिक संकटों से घिरा था तो भारत की अर्थव्यवस्था को दुनिया के निवेशकों के लिए खोलकर उन्होनें आर्थिक क्रांति ला दी थी। उनकी खामोशी भी बात किया करती थी। अब ऐसी भारत की राजनीति की शख्सियत हमेशा के लिए मौन हो गई है। उन्होनें 92 साल की उम्र में दिल्ली एम्स में अंतिम सांस ली। आइये जानतें हैं नौकरशाही और राजनीति में मनमोहन सिंह के पांच दशक के करियर की एक झलक…

Manmohan Singh के पांच दशक

1954 में पंजाब विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की।

1957 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से इकॉनामिक्स ट्रिपोस

1962 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में डी. फिल।

1971 वाणिज्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के रुप में भारत सरकार में शामिल हुए।

1972 में वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार नियुक्त हुए।

1980 से 1982 तक योजना आयोग के सदस्य।

Manmohan Singh

1982 से 1985 तक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर

1985 से 1087 चक योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रुप में कार्य किया।

1987 से 1990 तक जिनेवा में दक्षिण आयोग के महासचिव

1990 में आर्थिक मामलों पर पीएम के सलाहकार नियुक्त हुए।

1991 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष नियुक्त हुए। इसी के साथ असम से राज्यसभा के लिए चुने गए और 1995,2001,2007 और 2013 में फिर से चुने गए।

Manmohan Singh

1991 से 1996 तक पीवी नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री

1998 से 2004 तक राज्यसभा में विपक्ष के नेता।

2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री

26 दिसंबर 2024 को 92 वर्ष की उम्र में निधन।

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