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पीएम आवास योजना का लाभ लेकर किराए पर चढ़ा रहे मकान, अधिकारी जान कर भी बन रहे अंजान

गरीबों के सर पर छत देने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना चलाई जा रही है। लेकिन कुछ लोग इस योजना का ही पलीता लगाते हुए नजर आ रहे हैं। कुछ लोग खुद को गरीब बताकर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर तो ले रहे हैं, लेकिन उन घरों में ना रह कर वो उनको किराए पर चढ़ा दे रहे हैं।

पीएम आवास योजना का लोग कर रहे दुरूपयोग

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को आवास उपलब्ध कराए जाते हैं। लेकिन कुछ लोग इसका गलत फायदा उठा रहे हैं। लोग इस योजना के तहत आवास तो ले रहे हैं, लेकिन बाद में इन्हें किराए पर चढ़ा दे रहे हैं। जबकि इन आवासों को किराए पर चढ़ाना अपराध है।

बता दें कि इन मकानों को 9 सालों तक किराए पर नहीं दिया जा सकता है। ना ही इन्हें बेचा जा सकता है। लोकिन फिर भी कुछ लोग नियमों को ताक पर रख कर 4000 से 5000 रुपए रेंट पर प्रधानमंत्री आवास को ही किराए पर दे रहे हैं।

अधिकारी जान कर भी बन रहे अंजान

मिली जानकारी के मुताबिक राजधानी देहरादून में 70 लोगों ने खुद को गरीब बताकर फ्लैट्स लेकर फिर उन्हें किराए पर चढ़ा दिया। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने फ्लैट एमडीडीए ने बनाये और आवंटन करने के लिए नगर निगम ने सूची तैयार की थी।

लेकिन अब जिस तरह से फ्लैट्स लेकर किराए पर देने की बात सामने आ रही है तो एमडीडीए विभाग और नगर निगम एक दूसरे पर पल्ला झाड़ रहे है। अधिकारी सब कुछ जानकर भी अंजान बन रहे हैं। आज तक ऐसे लोगों पर कोई भी कार्रवाई नहीं हो पाई है जिन्होंने खुद को गरीब बताकर योजना का लाभ लिया है और फिर कमरे किराए पर चढ़ा दिए हैं।

ऐसा करने वालों के खिलाफ की जाएगी कड़ी कार्रवाई

इस पूरे मामले में एमडीडीए उपाध्यक्ष का कहना है की प्रधानमंत्री आवास योजना का निर्माण एमडीडीए ने किया है। लेकिन जो सूची नगर निगम से चयनित होकर आई थी उसी के आधार पर भी आवंटन किया हुआ है। जिस तरह से ये मामला सामने आया उसकी जांच कराई जाएगी।

जबकि उप नगर आयुक्त का कहना है की नगर निगम द्वारा चिन्हित किए गए ऐसे लाभार्थियों को उनको एमडीडीए विभाग में सूची बनाकर भेज दिया जाता है। जिसके बाद एमडीडीए लॉटरी सिस्टम के माध्यम से लाभार्थियों को आवंटित करती है। हालांकि शिकायत आई थी कि इन फ्लैट्स में सुविधाएं नहीं मिल रही है। अगर कोई लाभार्थी अपना फ्लैट किराए पर देता है तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इनपुट – हिमांशु चौहान

Yogita Bisht

योगिता बिष्ट उत्तराखंड की युवा पत्रकार हैं और राजनीतिक और सामाजिक हलचलों पर पैनी नजर रखती हैंं। योगिता को डिजिटल मीडिया में कंटेंट क्रिएशन का खासा अनुभव है।
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