Penetration जरूरी…?, रेप पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपी की सजा की कम

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 20 साल पुराने रेप मामले में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी को चौंका दिया। ना सिर्फ फैसला सुनाया बल्कि आरोपी की सजा को आधा भी कर दिया। कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि रेप के लिए Penetration होना जरूरी है, बिना उसके रेप नहीं बल्कि रेप का प्रयास माना जाएगा। अब सोशल मीडिया पर ये फैसला चर्चा का विषय बन गया है। चलिए जानते है पूरा मामला आखिर है क्या? किस आधार पर कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है?
Penetration जरूरी…?, रेप पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
ये पूरा मामला छत्तीसगढ के धमतरी जिले का है। इस केस में ट्रायल कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आरोपी को रेप के लिए सात साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। लेकिन हाईकोर्ट ने इस मामले में रेप नहीं बल्कि रेप का प्रयास बताते हुए सजा को आधा यानी साढ़े तीन साल कर दिया। कोर्ट का कहना है कि “पेनिट्रेशन साबित नहीं हुआ, इसलिए यह रेप नहीं बल्कि रेप का प्रयास है।”
पीड़िता के हाथ-पैर बांधकर, मुंह में कपड़ा ठूंस कर किया दुष्कर्म
दरअसल ये पूरा मामला 21 मई 2004 का है। जहां पर धमतरी में पीड़ित लड़की घर पर अकेली थी। आरोपी ने उसे पहले बहाने से दुकान जाने के लिए ललचाया। वहां से वो उसे अपने घर ले गया। जहां उसके हाथ-पैर बांधकर, मुंह में कपड़ा ठूंस कर उसके साथ दुष्कर्म किया।
पीड़िता ने 2004 में आरोपी के खिलाफ केस दर्ज करवाया। अप्रैल 2005 में आरोपी को आईपीसी की धारा 376(1) के तहत रेप का दोषी ठहराया। जिसमें उसको 7 साल की सजा और धारा 342 के तहत 6 महीने की सजा सुनाई गई। जो समवर्ती रूप से चलनी थी।
कोर्ट ने दिया ये फैसला
आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील की। इस केस की सुनवाई जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने की। 16 फरवरी 2026 को फैसला सुनाया गया। जिसमें कोर्ट ने कहा कि आरोपी का इरादा स्पष्ट और गलत है। हालांकि मेडिकल और बाकी सबूतों के आधार पर पूरा पेनिट्रेशन साबित नहीं हुआ। जिससे ये मामला रेप का नहीं बल्कि बलात्कार के प्रयास का बनता है।
रेप नहीं रेप का प्रयास- हाईकोर्ट
तो वहीं पीड़िता के बयान में विरोधाभास पाया गया। पीड़िता ने क्रॉस-एग्जामिनेशन में आंशिक पेनिट्रेशन की संभावना बताई, लेकिन पूरी तरह से पेनिट्रेशन साबित नहीं हुआ। साथ ही डॉक्टर की गवाही में भी रेप पर निश्चित राय नहीं दी गई। लेकिन फॉरेंसिक रिपोर्ट में सीमन पाया गया। हालांकि कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा, “रेप का आवश्यक तत्व पेनिट्रेशन है, न कि डिस्चार्ज. सबूत से हिंसक यौन हमला साबित होता है, लेकिन पेनिट्रेशन नहीं.”
फैसले के बाद आरोपी की बदली गई धारा
इस फैसले के बाद दोषसिद्धि को धारा 376 के साथ 511 (प्रयास) में बदला गया। अब आरोपी को नई सजा साढ़े 3 साल के लिए जेल, 200 रुपये जुर्माना और धारा 342 के तहत 6 महीने की सजा है। ट्रायल के दौरान आरोपी पहले ही करीब 1 साल 1 महीने जेल में बिता चुका है। जिसे सेट ऑफ किया जाएगा। आरोपी बेल पर था जिसके चलते उसे दो महीने में ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने का आदेश दिया गया है।