
हरिद्वार जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर पहली बार जीती बीजेपी के प्रत्याशी सुभाष वर्मा की की मुश्किलें बढ़ सकती है. कल जिला पंचायत चुनाव में जीत हासिल करने के बाद बीजेपी नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष सुभाष वर्मा के समर्थकों द्वारा कलेक्टर भवन में जीत की खुशी में आतिशबाजी की गई थी. कलेक्टर भवन जिला कोर्ट से सटा हुआ है. इसी को लेकर हरिद्वार के अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने कोर्ट में याचिका दायर की है कि जीत की खुशी में की गई आतिशबाजी की वजह से कोर्ट के कार्य में बाधा आई थी जो कि हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना है और इस पर हरिद्वार जिलाधिकारी द्वारा भी कोई कार्रवाई नहीं की गई थी. इस याचिका पर सुनवाई 21 तारीख को कोर्ट द्वारा की जाएगी.
याचिकाकर्ता अधिवक्ता अरुण भदौरिया का बयान
याचिकाकर्ता अधिवक्ता अरुण भदौरिया का कहना है कि हाई कोर्ट नैनीताल द्वारा 2004 में आदेश दिया गया था कि कोर्ट में मोबाइल की आवाज भी नहीं आनी चाहिए. इससे कोर्ट के कार्य में विघ्नता आती है. मगर इसके विपरीत कल जिला पंचायत चुनाव में इस नियम की अवहेलना की गई जिला पंचायत अध्यक्ष बने बीजेपी के सुभाष वर्मा व उनके समर्थकों द्वारा जीत की खुशी में हरिद्वार जिलाधिकारी दीपेंद्र सिंह चौधरी की मौजूदगी में जमकर आतिशबाजी की गई. इसकी वजह से कोर्ट में न्याय कार्य में बाधा पहुंची. मुझे खुद एक केस में जिरह करना था. इस आतिशबाजी की वजह से में उसे नहीं कर पाया. यह सब कार्य जिलाधिकारी की मौजूदगी में हुआ. जिलाधिकारी को हाईकोर्ट के आदेश की पूरी जानकारी थी. इसके बावजूद भी उनके द्वारा इस कार्य को नहीं रोका गया इसलिए जिलाधिकारी दीपेंद्र सिंह चौधरी और जिला पंचायत नवनिर्वाचित अध्यक्ष सुभाष वर्मा इस कार्य को करने के दोषी है. इसलिए मैनें दोनों के खिलाफ सीजीएम कोर्ट में याचिका दायर की है और इसकी सुनवाई 21 तारीख को कोर्ट में की जाएगी
उत्तराखंड बनने के बाद बीजेपी से पहली बार हरिद्वार जिला पंचायत अध्यक्ष बने सुभाष वर्मा की मुश्किलें अब बढ़ सकती है, क्योंकि जीत हासिल करने के बाद जिस तरह से उनके कार्यकर्ताओं द्वारा कोर्ट परिसर के पास ही जमकर आतिशबाजी की गई उसके बाद अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने सीजेएम कोर्ट में इस आतिशबाजी के खिलाफ याचिका दायर की है. अब 21 तारीख को सुनवाई होने के बाद कोर्ट अपना रुख स्पष्ट करेगा मगर अब देखना होगा कि इस मामले पर सुनवाई के बाद कोर्ट द्वारा क्या फैसला किया जाता है