Exclusive : उत्तराखंड से भागने के फेर में अधिकारी, कैसे संभालेंगे पुष्कर?

देहरादून। त्रिवेंद्र रावत की सीएम की कुर्सी जा चुकी है। उनके बाद तीरथ सिंह रावत आए कुछ दिन राज्य की बागडोर संभाली और अपने बयानों को लेकर चर्चाओं में रहे और फिर कुर्सी से हटा दिए गए। फिर हाईकमान ने युवा के हाथ में राज्य की बागडोर सौंपी, वो हैं पुष्कर सिंह धामी। लेकिन हैरानी इस बात की है कि त्रिवेंद्रा रावत के कुर्सी से उठने के बाद उनके चहेते अफसर भी अपनी कुर्सी में बैठने के मूड में नहीं हैं और वो कुर्सी छोड़कर इधर उधर भागने में लगे हैं। धीरे धीरे उनका काम से मोह भंग हो गया है और वो कुर्सी छोड़कर दाएं बाएं जाने की जुगाड़ में हैं।

कोई पढ़ाई तो कोई केंद्रीय प्रतिनुयुक्ति के नाम पर भागने की फिराक में

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार कोई पढ़ाई तो कोई केंद्रीय प्रतिनुयुक्ति के नाम पर उत्तराखंड से जाना चाह रहा है। सवाल ये है कि जब अफसरों को वहीं कुर्सी और सैलरी मिल रही है तो मुखिया के बदलने से उन्हें इतना फर्क क्यों पड़ रहा है? क्या उनके लिए सीएम चेहरा जरुरी हो गया है? क्या राज्य के प्रति उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है? क्या अपने चहेते सीएम के रहते ही उनकी काम की जिम्मेदारी थी?

उत्तराखंड में अफसर शाही हमेशा से ही सरकार पर हावी रही

आईएएस सरकार चलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। राज्य भले ही सरकार के हाथ में हो लेकर राज्य का विकास और राज्य को चलाते अफसर ही हैं। अफसर ही सरकार की घोषणाओं को पूरा करते और राज्य की जनता की सेवा के लिए समर्पित करते। राज्य की छवि को सुधारने और बिगाड़ने दोनों में अफसरों का बड़ा हाथ होता है।लेकिन ये बात भी किसी से छुपी नहीं है कि उत्तराखंड में अफसर शाही हमेशा से ही सरकार पर हावी रही है और इसका रिजल्ट भी देखा गया। अब कई अफसर ऐसे हैं जो त्रिवेंद्र सरकार में अहम भूमिका निभा रहे थे वो भागने के जुगत में हैं।

ये अफसर कुर्सी छोड़कर भागने की जुगत में

आपको बता दें कि अल्मोड़ा के डीएम रहे सबिन बंसल हायर स्टडी के लिए यूके जा चुके हैं। वहीं त्रिवेंद्र रावत के चहेते अफसरों में से एक नीरज खैरवाल एक एनसीआर में एक विवि में पढ़ाने जा चुके हैं। त्रिवेंद्र सरकार में सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाली अफसर राझिका झा पहले तो सीसीएल लीव पर रहीं और अब केंद्र में एक पीएसओ में जाने के लिए एनओसी की बात कर रही हैं। वहीं उनके पति नितेश झा भी पोस्टिंग को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं।

आईएएस मनीषा पंवार पति के पास विदेश जाने की अर्जी लगा चुकी हैं-सूत्र

बात करें आईएएस मनीषा पंवार की तो वह भी अपने पति के पास विदेश जाने की अर्जी लगा चुकी हैं। सूत्रों का कहना है कि वित्त सचिव अमित नेगी और प्रमुख सचिव आरके सुधांशु भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने को एनओसी ले चुके हैं। हो ना हो इससे सबसे बुरी स्थिति वित्त विभाग की होने वाली है। अमित नेगी अगर केंद्र में चले गए तो विभाग की बागडोर सौजन्या के हाथ में आएगी जो की निर्वाचन अधिकारी भी हैं। राज्य में आचार संहिता लगने वाली है। ऐसे में  सौजन्या के पास वित्त विभाग के लिए ही वक्त बचेगा।

फाइलों में सिगनेचर तो अफसरों के होने हैं

बड़ा सवाल ये है कि अफसर तो राज्य से भागने की फिराक में हैं। कोई केंद्र जाना चाहता है तो कोई विदेश ऐसे में राज्य किसके हाथों में होगा और चलेगा। फाइलों में सिगनेचर तो अफसरों के होने हैं वो कौन करेगा। सरकार कब तक अफसरों का ट्रांसफर करेंगी। नए अफसर को आकर काम समझने में समय़ भी लगेगा लेकिन इतना समय नहीं है कि पहले काम को सझमा जाए और फिर किया। सरकार एक के बाद एक कर कई घोषणाएं कर रही है तो ये काम कौन करेगा? क्या इससे सरकार की ही किरकिरी नहीं होगी। सरकार को अफसरों पर लगाम लगाने की जरुरत है या तो सख्त एक्शन लेने की जरुरत है।

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