5 करोड़ का काम 61 करोड़ में!, BJP के वरिष्ट नेता ने अपनी ही सरकार पर लगाए आरोप

अर्धकुंभ 2027 को लेकर घमासान मचा हुआ है। पहले अखाडा परिषद और अब भाजपा के वरिष्ठ नेता, हरिद्वार के प्रथम जिला पंचायत अध्यक्ष और श्रीगंगा सभा के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ने अपनी ही सरकार पर सतीकुंड पुनरोद्धार परियोजना को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
BJP के वरिष्ट नेता ने अपनी ही सरकार पर लगाए आरोप
दरअशल अशोक त्रिपाठी का दावा है कि जिस कार्य की वास्तविक लागत लगभग 5 करोड़ रुपए होनी चाहिए थी। उसे 61 करोड़ रुपए में स्वीकृत किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना की डीपीआर, ठेका प्रक्रिया और कार्यदायी संस्था के चयन में पारदर्शिता नहीं दिखाई गई।
5 करोड़ का काम 61 करोड़ में, गुजरात की कंपनी को दिया ठेका
उनका कहना है कि डीपीआर यूयूआईडीसी ने तैयार की, कार्यदायी संस्था एनबीसीसी बनाई गई और ठेका गुजरात की एक कंपनी को दे दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उत्तराखंड में ऐसी कोई संस्था नहीं थी जो ये कार्य कर सकती थी।
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जीरो टॉलरेंस के दावे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ वास्तव में सख्त है तो सतीकुंड परियोजना की पूरी डीपीआर और लागत का ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए। साथ ही इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए।
मुख्यमंत्री से मिलने का किया प्रयास, नहीं मिला समय
प्रेसवार्ता के दौरान अशोक त्रिपाठी ने ये भी आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री से मिलने का प्रयास किया। लेकिन उन्हें समय नहीं मिला। उन्होंने भाजपा संगठन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी में कार्यकर्ताओं की बात सुनने का कोई मंच नहीं बचा है। इसलिए उन्हें मीडिया के सामने अपनी बात रखनी पड़ रही है।
मेला अधिकारी ने दी धमकी!
उन्होंने मेला अधिकारी पर भी बातचीत के दौरान परोक्ष रूप से धमकी देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्हें डराने का प्रयास करने वालों की इतनी हैसियत नहीं है।अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि यदि एक वरिष्ठ भाजपा नेता अपनी ही सरकार से 5 करोड़ और 61 करोड़ के अंतर का हिसाब मांग रहे हैं।
तो क्या सरकार इन सवालों का सार्वजनिक जवाब देगी? क्या सतीकुंड परियोजना की डीपीआर और ठेका प्रक्रिया जनता के सामने लाई जाएगी? और क्या इन आरोपों की स्वतंत्र जांच होगी, या ये मामला भी केवल राजनीतिक बयानबाज़ी बनकर रह जाएगा?