उत्तराखंड में रस्सी पर लटका विकास, पुल के इंतजार में बीते साल

आज जहां हमारा देश चांद पर पहुंच गया है, तो वहीं उत्तराखंड आज भी विकास के लिए तरस रहा है। खासकर पहाड़ों में स्कूल जाना हो, अस्पताल जाना हो, बाज़ार से सामान लाना हो या रोज़मर्रा का कोई काम, हर बार इसी लोहे की पुरानी जंग लगी रस्सी और ट्रॉली का सहारा लेना पड़ता है।
बागेश्वर में पुरानी जंग लगी ट्रॉली से नदी पार कर रहे लोग
दरअसल सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है। ये वीडियो बागेश्वर के कपकोट इलाके का है। जहां मासूम बच्चे हों, बुज़ुर्ग हों, मरीज़ हों या कोई भी अन्य व्यक्ति, सबको अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इस उफनती रामगंगा नदी को पार करना पड़ता है। हर बार इसी लोहे की पुरानी जंग लगी ट्रॉली का सहारा लिया जाता है।
साल 2018 में ढ़ह गया पुल
वैसे तो इस ट्रॉली से पहले यहां एक पुल हुआ करता था। जो साल 2018 में रामगंगा नदी की बाढ़ में बह गया। लेकिन उसके बाद किसी ने भी रामगंगा नदी पर दूसरा पुल बनाने की जहमत नहीं उठाई। लगातार खबरें चलाई गईं। लेकिन इसके बावजूद शासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। लिहाज़ा, गांव वालों ने अपनी ज़िंदगी को इसी रस्सी के सहारे जोखिम में डालकर जीना सीख लिया।
इस जोखिम से दो लोगों की चली गई जान
मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि अब तक इस जोखिम भरे रास्ते ने दो लोगों की जान ले ली है। कई लोग इस तरह नदी पार करते हुए घायल भी हुए हैं। लेकिन इसके बावजूद बड़े-बड़े विकास के वादे करने वाले नेताओं को बागेश्वर के लोगों की यह मजबूरी नहीं दिखी।
वीडियो वायरल, प्रशासन ने लिया संज्ञान
हालांकि जैसे ही ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। लोगों का आक्रोश फूट पड़ा। प्रशासन ने भी वीडियो वायरल होते ही तुरंत मामले का संज्ञान लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब नया पुल बनाने के लिए करीब 23 करोड़ 38 लाख रुपए की लागत का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
पुल बनने की बात कही जा रही
डीपीआर बनने की बात भी कही जा रही है। साथ ही दिसंबर 2026 तक टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी बताई जा रही है।हालांकि प्रशासन की इस घोषणा के बाद अब एक उम्मीद तो जगी है लेकिन सवाल यही है कि क्या ये प्रस्ताव फाइलों से निकलकर पुल की शक्ल में नदी पर खड़ा दिखाई देगा या नहीं?