मतदान के लिए पर्वतीय इलाकों के लोगों को जागरुक कर रही ADR की टीम, पहाड़ से पहाड़ तक जारी अभियान

गैरसैंण : 18 नवम्बर से चला एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स उत्तराखंड इलेक्शन वॉच के अभियान दल का मतदाता जागरूकता अभियान पिछले दो दिनों में चमोली में बदस्तूर जारी रहा है और एडीआर उत्तराखंड इलेक्शन वॉच अभियान दल ने चमोली जनपद के मंडल, जोशीमठ, गोपेश्वर, चमोली, पीपलकोटी, लंगाशू, कर्णप्रयाग, घंडियाल, चांदपुर, आदि बद्री, खेती, जंगलचट्टी, दिवालिखाल एवम गैरसैण में पूरे जोर शोर से जारी रखा। अभियान दल के सदस्यों द्वारा बड़ी मात्रा में पर्चे पत्र बांटकर एडीआर उत्तराखंड इलेक्शन वॉच के द्वारा संकलित डाटा से मतदाताओं को अवगत कराते हुए जागरूक किया गया।

पहाड़ से पहाड़ तक की यात्रा

एडीआर- उत्तराखंड इलेक्शन वॉच के समन्वयक एवम पहाड़ से पहाड़ तक यात्रा अभियान दल के कर्णधार ‘सैनिक शिरोमणि’ मनोज ध्यानी ने बताया कि एडीआर द्वारा संकलित डाटा निर्वाचन के समय प्रत्याशियों द्वारा भरे गए चुनावी पर्चे में भरे गए चुनावी विवरण के आधार पर तैयार है। उन्होंने बताया कि एडीआर द्वारा संकलित डाटा के आधार पर ऐसा निष्कर्ष निकल रहा है कि 50 प्रतिशत से अधिक विधायकों पर निर्वाचन पर्चा भरने के समय आपराधिक मुकदमे रहे थे।

पिछले निर्वाचन पत्र भरते वक्त 70 प्रतिशत से अधिक विधायक करोड़पति -रिपोर्ट

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार से पिछले निर्वाचन पत्र भरने के वक्त 70 प्रतिशत से अधिक विधायक करोड़पति विधायक थे। उन्होंने कहा कि अगल साल 2017 के समय भरे निर्वाचन पत्रों के डाटा का साल 2012 के समय भरे निर्वाचित विधायकों के डाटा के साथ तुलनात्मक अध्ययन किया जाए तो पता चल रहा है कि जहाँ 2012 में 19 विधायकों पर आपराधिक मुकदमे चल रहे थे। वहीं 2017 में यह संख्या बढ़कर 20 हो गई थी। विधायकों पर गंभीर मुकदमे जैसे कि हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती आदि की बात की जाए तो जहां 2012 में 05 विधायकों पर गंभीर आपराधिक मुकदमे थे वहीं यह संख्या 2017 में बढ़कर 14 हो गईं थी। मनोज ध्यानी ने बताया कि 2017 में 2012 के मुकाबले करोड़पति विधायकों की संख्या भी 32 से बढ़कर 46 हो गई।

अभी तक केवल 65 विधायकों का विश्लेषण किया है

एडीआर उत्तराखंड इलेक्शन वॉच के समन्वयक का कहना है कि 2017 के आंकड़े विश्लेषण करने में अभी तक केवल 65 विधायकों का विश्लेषण किया है यदि 5 और विधायकों का विश्लेषण करें तो यह संख्या बढ़ भी सकती है.एडीआर उत्तराखंड इलेक्शन वॉच के अभियान दल के द्वारा यह प्रचार प्रसार किया जा रहा है कि जन-सरोकारों के लिए क्रियाशील प्रबुद्ध जन संगठन, मीडिया समूह, मतदाता इस बात पर निगाह बनाए रखें यदि किसी भी राजनैतिक दल द्वारा अपने उम्मीदवारों का अपराधिक विवरण टीबी, अखबार एंव सोशल मीडिया में तीन बार प्रचारित प्रसारित किया है अथवा नहीं एडीआर उत्तराखंड इलेक्शन वॉच विभिन्न राजनैतिक दलों द्वारा अर्जित की गई आय एंव व्य्य का व्यौरे भी अपने प्रचों के द्वारा कर रही है.

मेरा वोट मेरा उत्तराखंड नाम से संचालित हो रहा अभियान

एडीआर उत्तराखंड इलेक्शन वॉच का अभियान मेरा वोट मेरा उत्तराखंड नाम से संचालित हो रहा है एंव आगामी चुनाव में जनता से अनुरोध किया जा रहा है एक साफ छवि वाले और ईमानदार उम्मीदवार को मतदान करने की शपथ लें जो कि अच्छा काम करें मतदाताओं से अनुरोध किया जा रहा है कि वह जाति, धर्म, पंत, लिंग, धन व उपहार के आधार पर मतदान ना देकर एक जिम्मेदार मतदाता बने मतदाताओं को इस बात के लिए भी जागरूक बनाया जा रहा है कि यदि कोई भी उम्मीदवार साफ छवि का नहीं है तो वह नोटा को भी विकल्प के रूप में अपना सकते हैं।

मनोज ध्यानी ने कहा कि एडीआर का एकमात्र मकसद मतदाताओं तक समुचित जानकारी उपलब्ध करवाकर उन्हें उस सूचना से लैस करना है ताकि वह बतौर जागरूक मतदाता चुनाव में एक बेहतर निर्णय ले सकें जिससे लोकतंत्र अपराधियों और पैसा वालों की मुठ्ठी में ही कैद होकर न रह जाए। मनोज ध्यानी ने कहा कि बतौर एडीआर-उत्तराखंड इलेक्शन वॉच के समन्वयक एवम पहाड़ से पहाड़ तक जारी अभियान दल का नेतृत्व करने के कारण उनकी कोशिश यह भी है कि मतदाता नोटा के विकल्प को भी एक एक सशक्त विकल्प के रुप में अपनाना सीखें।

क्या नोटा के लिये मतदान करना वोट का नुकसान करना नहीं है?

इस सवाल के जवाब में कि क्या नोटा के लिये मतदान करना वोट का नुकसान करना नहीं है। लेकिन ध्यानी का कहना है कि मतदाताओं के लिये नोटा भी एक सशक्त विकल्प है और नोटा के लिये किया गया मतदान जागरूक मतदाता होने का परिचायक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी परिस्थिति में जबकि राजनीतिक दल किसी ईमानदार, दाग रहित व्यक्ति को टिकट नहीं देते हैँ और मतदाता को यह लगता हों कि दलीय अथवा निर्दलीय प्रत्याशियों में कोई भी सही विकल्प नहीं बन रहा है तो नोटा कारगर सिद्ध होता है, उससे यह संदेश प्रवाहित होता है कि राजनीतिक दल ईमानदार और जन सरोकारों के पक्ष की राजनीती देने में नाकामयाब सिद्ध हो रहे हैँ।

फार डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स राष्ट्र के 1200 से अधिक संस्थाओं का है प्रतिनिधित्व समूह

विदित हो कि एसोशिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स राष्ट्र के 1200 से अधिक संस्थाओं का प्रतिनिधित्व समूह है जो कि सासंदों एवं विधायकों एवं चुनाव में खड़े प्रत्याशियों के स्वघोषित निर्वाचन पत्रों का संकलन कर उस डाटा को जनता के समक्ष लाता है। ADR उत्तराखंड इलेक्शन वॉच उसकी उत्तराखंड की प्रादेशिक ईकाई है एवं इसका अभियान दल 18 नवम्बर से पहाड़ से पहाड़ तक कि यात्रा देहरादून से होते हुए चकराता, लाखामंडल, पुरोला, बड़कोट , उत्तरकाशी, धनौल्टी, चम्बा, टिहरी, देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, जखोली, अगस्त्यमुनि, बांसवाड़ा, उखीमठ, तुंगनाथ, गोपेश्वर, चमोली, जोशीमठ, पीपलकोटी, नंदप्रयाग, लंघासू, कर्णप्रयाग, आदिबद्री, भराड़ीसैण, गैरसैण में सघन प्रचार प्रसार करते हुए कुमाऊं मंडल की ओर बढ़ रहा है।

एडीआर उत्तराखंड इलेक्शन वॉच अभियान दल में एडीआर उत्तराखंड के समन्वयक सैनिक शिरोमणि मनोज ध्यानी, आरटीआई क्लब के सचिव यज्ञ भूषण शर्मा, वरिष्ठ राज्य आन्दोलनकारी रविन्द्र प्रधान, शार्प विकलांग संघ के अध्यक्ष बृजमोहन नेगी,खुशपाल सिंह राणा सम्मिलित हैं। कर्णप्रयाग तक अभियान दल के साथ उत्तराखंड बेरोजगार संगठन के अध्यक्ष बॉबी पँवार भी साथ थे व वह अपनी माता के गिरते स्वास्थ्य कारण से घर के लिये अवमुक्त किए गए हैँ।

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