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उत्तराखंड : अभिनव थापर चला रहे खास तरह का अभियान, लड़ाई अभी बाकी है, हिसाब अभी बाकी है

abhinav thakur

देहरादून: अभिनव थापर ने कोरोना पीड़ितों से बिल एकत्रित करने के लिये प्रदेशभर में लड़ाई अभी बाकी है, हिसाब अभी बाकी है नाम से अभियान चलाया हुआ है। अब तक उन्होंने मीडिया और घर-घर पर्चों के माध्यम से इस अभियान को चलाया। लेकिन, अब उनकी टीम ने नुक्कड़ नाटक के जरिए लोगों को जागरूक करने का अभियान शुरू किया है। इसके तहत देहरादून के इंदिरानगर, वसंत विहार क्षेत्र में अभियान चलाया।

कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक का मंचन कर निजी अस्पतालों की खुली लूट दिखाई। इसके साथ ही नुक्कड़ नाटक में कोरोना में हुई समस्याओं जैसे हस्पतालों में प्लाज्मा, बेड न मिलना, दवाइयों की उपलब्धता, मरीजों से पैसे की लूट को दर्शाया गया। नुक्कड़ नाटक में कलाकार नीतीश, साहिल, अभिषेक, मीनाक्षी, श्यामल व करीना ने निजी अस्पतालों द्वारा की लूट से हुई जनता को परेशानी को दिखाया, और आमजन ने उनके प्रयासों में साथ देने के लिये प्रण लिया।

अभिनव थापर, विजयपाल रावत और उनके साथियों द्वारा कोरोना-काल में कोविड हेल्प सेंटर यूके नाम ग्रुप से बनाया। जिसके जरिए उत्तराखंड में हजारों परिवारों की मदद की थी। अब अभिनव थापर की टीम नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों को हस्पतालों से हुई लूट और उनके अत्यधिक बिल वापसी के संबध में जनजागरण चला रही है। जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को उनकी बिल वापसी लड़ाई में मदद मिल सके।

अभिनव थापर ने कहा कि चूंकि अभी यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। ऐसे में बिल एकत्रित करने के लिये लड़ाई अभी बाकी हिसाब है, हिसाब अभी बाकी है, अभियान के तहत उनकी हर संभव न्यायसंगत कोशिश रहेगी कि हर नागरिक को उनसे हस्पतालों द्वारा लूटे हुए पैसे की वापसी के संबंध में माननीय सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाया जा सके। इसके लिए जनता के विशेष सुझाव मिलने के साथ उनका समर्थन भी मिल रहा है।

कोरोना महामारी की पहली और दूसरी लहर में जहां लोग संकट से जूझ रहे थे। लोगों को इलाज नहीं मिल पा रहा था। प्राइवेट स्पताल लोगों को लूट रहे थे। अस्पतालों की इस लूट के खिलाफ देहरादून निवासी अभिनव थापर ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट की संयुक्त पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करने हुए के निजी अस्पतालों लिए गए अत्याधिक बिल चार्ज की अनियमिताओं, मरीजों को रिफंड जारी करने और पूरे देश के लिये गाइडलाइंस जारी करने के स्वास्थ्य मंत्रालय, केंद्र सरकार के साथ ही राज्यों से जवाब मांगा था।

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