पांच साल बाद देरी से पहुंचा मानसून, El Niño से बरसात पर पड़ेगा असर

लंबे इंतजार के बाद आखिरकार उत्तराखंड में मौसम ने करवट ले ली है। देहरादून से लेकर पहाड़ों तक झमाझम बारिश गर्मी से राहत दे रही हैं। कई जिलों में बारिश को लेकर अलर्ट भी जारी हुआ है। हालांकि इसी बीच वैज्ञानिकों ने एक बड़ी चेतावनी जारी की है। उनके मुताबिक इस बार मानसून ज्यादा बरसात लेकर नहीं आएगा। इसी के साथ महंगाई और पानी का संकट भी सभी को झेलना पड़ सकता है।
उत्तराखंड में मानसून की दस्तक
राजधानी देहरादून सहित उत्तराखंड के कई जिलों में आज भारी बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के मुताबिक पौड़ी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के लिए येलो अलर्ट है। वहीं बाकी जिलों में भी बिजली चमकने और तेज बारिश की संभावना है। मैदानी इलाकों में हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में हल्की बारिश के साथ तेज हवाओं की चेतावनी जारी की गई है।
एक हफ्ते लेट पहुंचा मानसून
इस बारिश ने गर्मी से थोड़ी राहत तो दी है। लेकिन आंकड़े बताते है कि 4-15 जून के बीच देश में जितनी बारिश होनी चाहिए थी, उससे 64 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं बात करें उत्तराखंड की तो पूरा जून का महीना ही सूखे में बीत गया।
मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो इस बार मानसून उत्तराखंड में एक हफ्ते लेट पहुंचा है। करीब पांच साल बाद उत्तराखंड में ऐसा हो रहा है कि मानसून एक हफ्ते लेट है। इस देरी के चलते लोगों को उमस और गर्मी झेलनी पड़ी।
अलनीनो है इसकी वजह El Niño
इस सब की वजह अलनीनो बताया जा रहा है। आमतौर पर प्रशांत महासागर के ऊपर चलने वाली तेज हवाएं गर्म पानी को एशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरफ ले जाती हैं। इस गर्म पानी की वजह से ज्यादा बादल बनते हैं और भारत तक नमी पहुंचती है। यही नमी मानसून को मजबूत बनाती है और अच्छी बारिश कराती है।
लेकिन जब ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, तो गर्म पानी वापस प्रशांत महासागर के बीच और पूर्वी हिस्से में फैलने लगता है। इससे समुद्र का तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ जाता है। इसी स्थिति जिसे अल नीनो कहा जाता है।
अल नीनो का मानसून पर भी पड़ता है असर
अल नीनो का असर सिर्फ प्रशांत महासागर तक ही नहीं रहता बल्कि इसकी वजह से बादलों के बनने का तरीका बदल जाता है। हवाओं का रुख बदल जाता है। भारत तक पहले जितनी नमी नहीं पहुंच पाती। इसका असर मानसून पर पड़ता है और बारिश कम हो सकती है।
इस साल देश में भी जून में सामान्य से कम बारिश
इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक देश में इस साल जून महीने के दौरान सामान्य से लगभग 39.8 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। ये जून 1901 के बाद से पांचवां सबसे सूखा जून रहा है। देश में जून के दौरान मोस्टली 165.3 मिमी बारिश होती है, लेकिन इस बार सिर्फ 99.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
उत्तराखंड में मानसून की शुरूआत सुस्त रही
वहीं टाइम्स ऑफ इंडिया में ही छपी दूसरी खबर ये बताती है कि उत्तराखंड में मानसून की शुरूआत सुस्त ही रही। अब तक उत्तराखंड में सामान्य से 32 फीसद कम बरसात हुई है। अलनीनो की वजह से मानसून इस बार काफी धीमा पड़ गया। जिस वजह से उत्तराखंड में लगातार तापमान में बढ़ोतरी हो रही थी।
अल नीनो से बरसात पर पड़ेगा असर
गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया था। हालांकि प्री मानसून की इस फुहार से लोगों के चेहरे तो खिले हैं। लेकिन अल नीनो इफेक्ट की वजह से वैज्ञानिकों का कहना है कि इस साल मानसून लंबे वक्त तक तो जरूर रहेगा लेकिन बरसात इस बार काफी कम देखने मिलेगी।