
उत्तराखंड में 2027 का चुनाव बेहद दिलचस्प रहने वाला है। एक तरफ सत्तासीन पार्टी कांग्रेस हैट्रिक लगाने के लिए तैयार दिख रही है तो वहीं कांग्रेस एंटीइंम्बेंसी के सहारे ही 2027 चुनाव में जीतने का ख्वाब देख रही है। लेकिन हकीकत तो ये है कि कांग्रेस 2027 चुनाव को जितना आसान मानकर चल रही है शायद ही चुनावी रणभूमि में उतरने के बाद चुनाव इतना आसान रहे।
BJP हैट्रिक लगाने को बेताब
जमीनी हकीकत तो ये है कि पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी जहां सत्ता की हैट्रिक की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं कांग्रेस कई सीटों पर अपनी पकड़ बचाने की चुनौती से जूझती दिख रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 47 सीटें जीतकर लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी। ये उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार हुआ कि किसी दल ने लगातार सत्ता दोहराई।
एंटी इनकम्बेंसी के सहारे जीत का ख्वाब देख रही कांग्रेस
वहीं कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसकी अस्थिर पकड़ है। कई सीटों पर पार्टी बेहद कम अंतर से जीती। अल्मोड़ा 127 वोट, द्वाराहाट 182 वोट, ये परिणाम बताते हैं कि जमीनी स्तर पर संगठन कमजोर है और जीत टिकाऊ नहीं मानी जा सकती। तराई और हरिद्वार क्षेत्र में जरूर कांग्रेस को कुछ सीटें मिलीं, लेकिन यहां भी उसे कड़ी टक्कर मिली।
कई जगहों पर बीजेपी से सीधी लड़ाई में कांग्रेस पिछड़ी, जबकि कुछ सीटों पर तीसरे दलों ने भी उसका गणित बिगाड़ा। ऐसे में अगर कांग्रेस सिर्फ एंटी इंकम्बेसी के दम पर जीत का ख्वाब देख रही है तो इसे मुंगेरी लाल के हसीन सपने ही कहेंगे, क्योंकि कांग्रेस की हकीकत तो ये है कि नेतृत्व का अभाव, स्पष्ट रणनीति की कमी और स्थानीय मुद्दों को राज्यव्यापी एजेंडा बनाने में असफलता कांग्रेस को नुकसान पहुंचा रही है।
उपचुनावों में मिली कुछ जीतें भी स्थायी राजनीतिक बढ़त में तब्दील होती नहीं दिख रहीं। वहीं कांग्रेस के भीतर अंतर्कलह, मनमुटाव जगजाहिर है। हाल ही में कांग्रेस के भीतर जो कुछ हुआ ये कांग्रेस के भीतर की कहानी को बयां करता है। एक तरफ मुख्यमंत्री धामी का युवा चेहरा और आक्रामक चुनावी शैली बीजेपी के लिए बड़ा हथियार बन सकती है, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को होने वाला है।
युवाओं की पहली पसंद हैं सीएम धामी
सीएम धामी युवाओं की पहली पसंद हैं। वहीं लगातार स्थानीय मुद्दों को उठाने के चलते उनकी पकड़ लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में भी मजबूत हुई है। जब लैंड जिहाद सख्त नकल कानून मदरसा बोर्ड भंग जैसे फैसले सीएम धामी की छवि को उत्तराखंड में ही नहीं देश में छाई हुई है, जिसका फायदा बीजेपी को 2027 विधानसभा चुनाव में मिल सकता है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस है जो सिर्फ एंटी इंकम्बेंसी के सहारे बैठी है।