
उत्तराखंड सरकार की उत्तराखंड संस्कृत अकादमी, हरिद्वार द्वारा आयोजित षोडश संस्कार प्रशिक्षण कार्यशाला एवं व्याख्यान माला का समापन सत्र गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समापन सत्र के मुख्य अतिथि संस्कृत शिक्षा विभाग उत्तराखंड शासन के सचिव दीपक कुमार गैरोला रहे।
हरिद्वार में षोडश संस्कार प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन
कार्यक्रम में पूर्व कुलपति उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय प्रो. दिनेश चंद्र शास्त्री, उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के सचिव प्रो. मनोज किशोर पंत और मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व प्राचार्य शिवनाथ संस्कृत महाविद्यालय डॉ. सूर्य मोहन भट्ट उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुश्री रामेन्द्री मंद्रवाल ने की।
भारतीय ज्ञान परंपरा को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना है उद्देश्य
कार्यक्रम की शुरुआत में अकादमी के सचिव प्रो. मनोज किशोर पंत ने सभी आगंतुक अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रस्तावित उद्बोधन में अकादमी की भावी कार्य योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अकादमी का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, विशेषकर संस्कृत और उससे जुड़े संस्कारों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है।
मुख्य अतिथि दीपक कुमार गैरोला ने अपने संबोधन में कहा कि षोडश संस्कार भारतीय जीवन परंपरा की वैज्ञानिक और आध्यात्मिक विरासत हैं। सरकार की मंशा है कि सनातन संस्कृति में वर्णित इन संस्कारों की महत्ता को आमजन, विशेषकर युवाओं तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ सकें। इस अवसर पर उपस्थित विद्वानों ने षोडश संस्कारों के विभिन्न पक्षों पर अपने विचार साझा किए और उन्हें जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।