
कर्नाटक खोला–रैलापाली–सरकार की आली को जोड़ते हुए विकास भवन तक प्रस्तावित लिंक मोटर मार्ग के निर्माण को लेकर अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा नेता एवं पूर्व दर्जा मंत्री बिट्टू कर्नाटक ने स्थानीय विधायक, अल्मोड़ा पर इस सड़क की स्वीकृति और निर्माण का झूठा श्रेय लेने का आरोप लगाया है।
सड़क निर्माण को लेकर अल्मोड़ा विधायक ने दी गलत सूचना
कर्नाटक ने कहा कि 12 दिसंबर 2025 को विधायक अल्मोड़ा द्वारा प्रेस को गलत सूचना देकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे ही सड़क निर्माण से जुड़ी निविदाएं आमंत्रित हुई, वैसे ही विधायक ढोल पीटकर इसका श्रेय लेने में जुट गए, जबकि इस मोटर मार्ग की स्वीकृति उनके लंबे संघर्ष का परिणाम है। कर्नाटक ने कहा कि यदि विधायक वास्तव में इस सड़क के निर्माण के लिए प्रयासरत रहे हैं तो वे यह बताएं कि उन्होंने कितने धरना-प्रदर्शन किए, कितने पत्र शासन और सरकार को भेजे और विधानसभा में इस सड़क को लेकर कितने सवाल उठाए। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि विधायक प्रेस के सामने दस्तावेजी साक्ष्य के साथ पूरी जानकारी रखें।
कर्नाटक ने लगाए जनता को भ्रमित करने के आरोप
कर्नाटक ने बताया कि 2014 में जैंती धामद्य अल्मोड़ा में शहीद दिवस के अवसर पर उन्होंने तत्कालीन सीएम से इस लिंक मोटर मार्ग की आवश्यकता को लेकर घोषणा करवाई थी। इसका उद्देश्य लोअर माल रोड में लगने वाले जाम से निजात दिलाना था। इसके बाद सालों तक लोक निर्माण विभाग और शासन स्तर पर कार्यवाही में ढिलाई बनी रही, जिस कारण उन्होंने लगातार पत्राचार, शिकायतें और आंदोलन किए। बिट्टू कर्नाटक ने बताया कि सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर कई शिकायतें दर्ज कराई और मुख्यमंत्री, डीएम अल्मोड़ा और लोक निर्माण विभाग को अनेक पत्र भेजे। साथ ही कई बार धरना-प्रदर्शन भी किया।
कर्नाटक ने मीडिया से की वास्तविक तथ्यों को जनता के सामने रखने की अपील
कर्नाटक ने बताया कि इन प्रयासों के परिणामस्वरूप वन भूमि हस्तांतरण की सैद्धांतिक स्वीकृति मिली, पुनरीक्षित आगणन शासन को भेजा गया और प्रथम चरण के लिए बजट भी स्वीकृत हुआ। सड़क का सर्वे कर टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई। वर्तमान में दूसरे चरण के लिए राज्य योजना के तहत 76.69 लाख रुपये की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। बिट्टू कर्नाटक ने मीडिया से अपील की कि वह वास्तविक तथ्यों को जनता के सामने रखे, ताकि कोई भी जनप्रतिनिधि दूसरों के संघर्ष का श्रेय लेकर जनता को गुमराह न कर सके।