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Pankaj Udhas: जियें तो जियें कैसे, चांदी जैसा रंग, यहां जानिए पंकज उधास की 5 हिट गजलें

लेजेंडरी सिंगर पंकज उधास का निधन हो गया है। पंकज उधास ने 26 फरवरी 2024 को 72 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। म्यूजिक जगत में पंकज उधास का अहम योगदान है। उन्होनें जिस भी गीत-गजल को अपनी आवाज दी वो गीत-गजल लोगों के दिलों को छू गया। आइये जानते हैं पंकज उधास की 5 बेहतरीन गीत-गजलों के बारे में।

5 hit ghazals of Pankaj Udhas

चांदी जैसा रंग

‘चांदी जैसा रंग है तेरा, सोने जैसे बाल, एक तू ही धनवान है गोरी, बाकी सब कंगाल’। ये गजल Pankaj Udhas की सबसे लोकप्रिय गजल है जिसे हमेशा सुना जाता रहेगा। इस गजल की पंक्ति सीधे दिल को छूती हैं।

और आहिस्ता जरूरी बातें

गजल ‘और आहिस्ता कीजिए बातें, धड़कनें कोई सुन रहा होगा’ को पंकज उधास ने बांसुरी, महिला बैक-अप और उचित समय पर बजने वाले कीबोर्ड के साथ खूबसूरती से व्यक्त किया है। ये गजल आज भी कई लोगों की पहली पसंद है।

घुंघुरु टूट गए

‘मोहे आई न जग से लाज, मैं इतना जोर से नाची आज, कि घुंघरु टूट गये’। ये गीत पंकज उदास का काफी लोकप्रिय है।

 Pankaj Udhas
Pankaj Udhas

चिट्ठी आई है

पंकज उधास की ये गजल ‘चिट्ठी आई है आई है, चिट्ठी आई है चिट्ठी आई है वतन से चिठ्ठी आई है बड़े दिनों के बात’ सबसे ज्यादा पंसद किया जाना वाला गीत है। इस गजल में आनंद बख्शी ने घऱ से दूर रहने वाले व्यक्ति की भावनाओं के बारे में लिखा है।

जियें तो जियें कैसे

1991 की फिल्म साजन में इस गाने के चार संस्करण हैं, जिसमें Pankaj Udhas स्वंय दिखाई देते हैं और इसे गाते हैं। ‘जिये तो जिये कैसे बिन आप के, लगता नहीं दिल कहीं, बिन आपके’, ये गीत आज भी प्रेमियों की धड़कन बढ़ा देता है।

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