कमलनाथ को इंदिरा मानती थी ‘तीसरा बेटा’, जानिए राजनीति से लेकर नाराजगी तक का पूरा सफर
मध्य प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के भाजपा में शामिल होनी की अटकलें हैं। अगर कमलनाथ कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामते हैं तो ये उनके समर्थकों और कांग्रेस पार्टी के लिए काफी आश्चर्यजनक और दुखद होगा। क्योंकि कमलनाथ का ना सिर्फ कांग्रेस पार्टी से पुराना गहरा नाता है बल्कि उन्हें गांधी परिवार का करीबी भी माना जाता है। यहां तक कि कमलनाथ को इंदिरा गांधी का तीसरा बेटा भी कहते हैं। आईये जानते हैं कमलनाथ की कहानी।
कमलनाथ का शुरुआती जीवन
कमलनाथ का जन्म 1946 में कानपुर में एक व्यवसायी परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम महेंद्र नाथ जबकि माता का नाम लीला नाथ है। उनके पिता ने फिल्मों के प्रदर्शन और वितरण, व्यापार पावर ट्रांसमिशन से जुड़ी कंपनियों की स्थापना की थी। शुरुआती पढ़ाई देहरादून से करने के बाद उन्होनें कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से बी.कॉम किया है। कमलनाथ देहरादून में संजय गांधी के क्लासमेट रहे हैं। 1973 में कमलनाथ का विवाह अलका नाथ से हुआ था। उनके दो बेटे नकुलनाथ और बकुलनाथ हैं। नकुलनाथ फिलहाल पिता की परंपरागत छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से सांसद हैं।

इंदिरा गांधी को मां कहते थे कमलनाथ
संजय गांधी कमलनाथ के क्लासमेट थे। यही दोस्ती आगे चलकर राजनीति पारी के आगाज का जरिया बनी। कमलनाथ 1968 में कांग्रेस में शामिल हुए। जैसे-जैसे कांग्रेस में समय गुजरता चला गया वो गांधी परिवार के करीब होते चले गेए। लोग कहते थे कि कमलनाथ को इंदिरा गांधी के तीसरे बेटे के तौर पर देखा जाता है। खुद चुनाव प्रचार में इंदिरा गांधी ने कमलनाथ को अपन तीसरा बेटा कहकर जीताने की अपील की थी। वहीं कमलनाथ भी इंदिरा गांधी को मां कहकर पुकारते थे।

कमलनाथ का सियासी सफर
1980 में कमलनाथ पहली बार सातवीं लोकसभा में चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। इसके बाद 1985, 1989, 1991, 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों में भी जीतकर संसद के निचले सदन तक पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान उन्होनें कई मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।
- 1991-1995 तक पर्यावरण एवं वन मंत्रालय में कंद्रीय राज्य मंत्री ( स्वतंत्र प्रभार)
- 1995-1996 तक वस्त्र मंत्रालय मे केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
- 2004 से 2009 तक वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।
- इसके बाद दिग्गज कांग्रेस नेता 2009 से जनवरी 2011 तक केंद्रीय मंत्री सड़क परिवहन और राजमार्ग रहे
- जनवरी 2011 से मई 2014 तक केंद्रीय मंत्री शहरी विकास
- अक्टूबर 2012 से मई 2014 तक केंद्रीय मंत्री संसदीय रहे।
2018 में बने मध्य प्रदेश के सीएम
कमलनाथ 2001 से 2004 तक कांग्रेस के महासचिव के पद पर रहे। साल 2018 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सत्तासीन भाजपा को हराकर कांग्रेस सत्ता में आई। इसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ सीएम बनाए गए। अप्रैल 2019 में उप-चुनाव जीतकर वह पहली बार विधायक बनाए गए। कमलनाथ 17 दिसंबर 2018 से 20 मार्च 2020 तक मध्य प्रदेश के सीएम रहे। ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक विधायकों की बगावत के बाद महज 15 महीनों में ही कमलनाथ वाली कांग्रेस सरकार गिर गई। कमलनाथ 2020 से 2022 तक नेता प्रतिपक्ष भी रहे हैं।

कांग्रेस पार्टी से क्यों नाराज हुए कमलनाथ?
दरअसल, पिछले साल दिसंबर में हुए मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में कमलनाथ कांग्रेस की ओर से सीएम का चेहरा थे। पार्टी इस चुनाव में जीत का दावा कर रही थी। लेकिन चुनावों में कांग्रेस बुरी तरह हार गई। हार का ठीकरा कमलनात के सिर में फूटा। इसके बाद कमलनाथ को पार्टी अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। उनकी जगह जीतू पटवारी को मध्य प्रदेश में कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। कहा जा रहा है कि इस पद से हटाए जाने के बाद कमलनाथ केंद्र की राजनीति में जगह चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद राज्यसभा चुनाव में भी उन्हें उम्मीदवारी नहीं मिली और उनकी दिग्विजय सिंह के साथ भी अनबन हुई। जिसके बाद उनकी कांग्रेस पार्टी से नाराजगी बढ़ती चली गई।