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राज्य आंदोलनकारियों का 22 साल का इंतजार खत्म, क्षैतिज आरक्षण बिल हुआ पास

राज्य आंदोलनकारियों का 22 सालों का लंबा इंतजार खत्म हो गया है। उत्तराखंड विधानसभा में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के चिह्नित आंदोलनकारी और उनके सभी पात्र आश्रितों को राजकीय सेवा में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने वाला विधेयक संशोधन के साथ पारित हो गया है।

बिना किसी चर्चा के पास हुआ बिल

बुधवार को राज्य आंदोलनकारियों का सालों पुराना इंतजार खत्म हो गया। उत्तराखंड विधानसभा में राज्य आंदोलनकारी क्षैतिज आरक्षण बिल पास हो गया है। संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने यूसीसी विधेयक पास होने के बाद चिह्नित आंदोलनकारियों व उनके आश्रितों को राजकीय सेवा में आरक्षण विधेयक 2023 संशोधन के साथ पारित करने का प्रस्ताव रखा। जिसे बिना किसी चर्चा के पास कर दिया।

प्रवर समिति की सिफारिशों को शामिल करते हुए किया पारित

बता दें कि आंदोलनकारियों व उनके आश्रितों को राजकीय सेवा में आरक्षण विधेयक 2023 पर विपक्ष की सहमति रही। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूड़ी ने मंगलवार को प्रवर समिति की रिपोर्ट सदन पटल पर रखी थी। इस रिपोर्ट में प्रवर समिति द्वारा दी गई सिफारिशों के बारे में बताया गया था। जिसके बाद बुधवार को प्रवर समिति की सिफारिशों को शामिल करते हुए विधेयक को पारित किया गया।

राज्य आंदोलनकारियों को होंगे ये फायदे

राज्य आंदोलनकारियों में इस बिल के पास होने के बाद से खुशी की लहर है। इस बिल के पास होने से आंदोलनकारियों को कई फायदे होंगे। आंदोलन कोटे से लगे कर्मियों की नौकरी बहाल होगी। लटके परीक्षा परिणाम घोषित हो सकेंगे। इसके साथ ही चिन्हित आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए नौकरियों में आरक्षण का रास्ता खुलेगा।

Yogita Bisht

योगिता बिष्ट उत्तराखंड की युवा पत्रकार हैं और राजनीतिक और सामाजिक हलचलों पर पैनी नजर रखती हैंं। योगिता को डिजिटल मीडिया में कंटेंट क्रिएशन का खासा अनुभव है।
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